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देवरिया : 14 साल तक रोककर रखी छात्रा की मार्कशीट, कोर्ट ने मैनेजर-प्रिंसिपल और सीनियर क्लर्क पर लगाया 20 लाख का जुर्माना

Published: Tue, 30 Jun 2026 10:37 PM (IST)Updated: Wed, 01 Jul 2026 02:01 AM (IST)

देवरिया की स्थायी लोक अदालत ने रैनाथ ब्रह्मदेव पीजी कॉलेज के प्रबंधक, प्राचार्य और वरिष्ठ लिपिक को एक छात्रा का ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. कॉलेज ने छात्रा का अंकपत्र 14 साल तक रोका।

  2. स्थायी लोक अदालत ने 20 लाख रुपये प्रतिकर का आदेश दिया।

  3. कॉलेज प्रबंधन की घोर लापरवाही पर अदालत की टिप्पणी।

विधि संवाददाता, देवरिया। स्थायी लोक अदालत ने छात्रा का अंकपत्र 14 वर्षों तक रोककर रखने के मामले में सलेमपुर स्थित रैनाथ ब्रह्मदेव पीजी कालेज के प्रबंधक, प्राचार्य और वरिष्ठ लिपिक के विरुद्ध कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने तीनों को संयुक्त रूप से 20 लाख रुपये प्रतिकर के रूप में छात्रा को अदा करने का आदेश दिया है। इसके अलावा 10 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया है।

रैनाथ ब्रह्मदेव पीजी कालेज की छात्रा सरिता देवी ने वर्ष 2011-12 में एमए की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। कालेज प्रबंधन ने अंक सुधार के नाम पर उनका मूल अंकपत्र अपने पास जमा करा लिया। इसके बाद सरिता देवी ने कई बार अंकपत्र वापस करने की मांग की, लेकिन कालेज प्रशासन ने उसे उपलब्ध नहीं कराया।

मार्कशीट ना मिलने से कई अवसर छेटू

अंकपत्र न मिलने से उन्हें लंबे समय तक विभिन्न अवसरों से वंचित रहना पड़ा। लगातार 14 वर्षों तक अंकपत्र नहीं मिलने पर सरिता देवी ने स्थायी लोक अदालत में वाद दाखिल कर कालेज प्रबंधन से क्षतिपूर्ति की मांग की। मामले की सुनवाई के दौरान स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष राकेश मिश्रा ने कालेज प्रबंधन को नोटिस जारी किया।

न्यायालय के कड़े रुख व हस्तक्षेप के बाद कालेज प्रशासन ने सरिता देवी का अंकपत्र उपलब्ध कराया। सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि कालेज प्रबंधन ने अपने नैतिक व संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि शिक्षण संस्थानों की ओर से इस प्रकार का व्यवहार किया जाएगा तो विद्यार्थियों का उन पर से विश्वास समाप्त हो जाएगा।