ब्लॉक मानिकपुर: :

ग्राम पंचायत चरदहा और अगरहुड़ा में संचालित गोवंश आश्रय स्थलों पर टीनशेड नहीं है। ग्राम बसिला में टीनशेड है, लेकिन गोवंश कम हैं। लालापुर बगरेही में टीनशेड नदारद है। ब्लॉक पहाड़ी

यहां नांदी व बूढ़ा सेमरवार में बने आश्रय स्थलों पर न तो टीनशेड है और न ही ठीक से खाने-पीने का इंतजाम यहां पर बेजुबान खुले आसमान के नीचे रात काटने को मजबूर हैं। ब्लॉक कर्वी

ग्राम सिद्धपुर, सपहा, कसहाई, सपहा व रगौली में शेड नहीं है। जमीन पथरीली होने से परेशानी है। प्रधानों ने गोवंश को ठंड से बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए हैं। जागरण संवाददाता, चित्रकूट : जिले में शीतलहर के साथ ठंड ने पैर पसार दिए हैं। न्यूनतम पारा 10 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक पशु आश्रय स्थलों में बंद गोवंशों को ठंड से बचाने के इंतजाम नहीं किए गए हैं। टीनशेड का निर्माण किए जाने संबंधी डीएम के आदेश के बावजूद गोवंश ठंड में ठिठुर रहे हैं।

अन्ना पशुओं को संरक्षित करने का जिम्मा सरकार ने फरवरी 2019 में उठाया था। इसके लिए जिले में 270 पशु आश्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से 10 स्थायी हैं। यहां रहने वाले कुल बेसहारा गोवंशों की संख्या 27495 है। इसके अलावा अन्य सात पंजीकृत गोशालाओं में 12 सौ गोवंश हैं। इनके भरण पोषण के लिए शासन ने साढ़े तीन करोड़ रुपये जारी किए थे। 1.45 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। वर्तमान में किसी भी अस्थायी आश्रय स्थल पर टीनशेड की व्यवस्था ही नहीं है। हालांकि प्रशासन 75 आश्रय स्थलों पर टीनशेड की व्यवस्था करा रहा है, लेकिन ये काम कब तक पूरा होगा अभी तक ये साफ नहीं हो सका है। 270 पशु आश्रय केंद्रों में से 10 में टीनशेड है। 75 में काम चल रहा है। धनराशि के लिए सिर्फ 110 से डिमांड आई है। इनमें से 13 केंद्रों को 13 लाख रुपये का बजट दिया जा चुका है। शेष 97 केंद्रों में जल्द ही धनराशि पहुंच जाएगी।

केपी यादव - जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।

Posted By: Jagran

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