चित्रकूट (जेएनएन)। एक-एक कर पाठा से डाकुओं का साम्राज्य खत्म होने लगा है। इसी क्रम में आज चित्रकूट में मानिकपुर पुलिस ने पाठा के मरवरिया जंगल में मुठभेड़ के दौरान पांच लाख रुपये के अंतरराज्यीय डकैत बबुली कोल गैंग के सदस्य को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए डाकू गंगा प्रसाद उर्फ गंगोलिया के लिए 15 हजार रुपये का इनाम घोषित है। उस पर यूपी व मध्य प्रदेश में एक दर्जन से च्यादा मुकदमे दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी से गिरोह के अन्य सदस्यों के शिकंजे में आने की संभावना है। उल्लेखनीय 1970 से अब तक 47 साल की लंबी समयावधि में ददुआ, ठोकिया, रागिया, घनश्याम (नान डाकू), बलखड़िया, शंकर, पप्पू यादव जैसे कुख्यात सरगनाओं समेत लगभग दो दर्जन डाकुओं का खात्मा किया जा चुका है। ददुआ, ठोकिया, बलखड़िया आदि गिरोहों के हार्डकोर सदस्यों समेत करीब तीन दर्जन डकैत बांदा जेल में हैं।

भाग जाएंगे पाठा के जंगलों से डाकू

वैसे भी अब पाठा के जंगलों में पुलिस की स्थाई दस्तक होने जा रही है। उनकी मौजूदगी का एहसास हर समय होने से जंगलों से डकैत पलायन कर जाएंगे। डकैतों की बादशाहत खत्म करने के लिए सरकार ने यहां पुलिस प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना पर मुहर लगा दी है। 300 करोड़ रुपये से इस केंद्र के लिए प्रस्ताव बना है और एसपी ने डीएम से इसके लिए मानिकपुर व मारकुंडी थानों के बीच 200 एकड़ जमीन मांगी है। साथ ही शासन को इस संबंध में पत्र लिखा गया है। एक माह में जगह मिलने की भी संभावना है। दस्यु प्रभावित इलाकों में नए थाने और पुलिस चौकियां भी स्थापित होंगी। दस्यु प्रभावित क्षेत्र मानिकपुर को नया सीओ सर्किल बनाने पर सहमति है। इसमें मानिकपुर, मारकुंडी व बहिलपुरवा थाने जुड़ेंगे। भरतकूप व सीतापुर चौकी को थाना बनाने की हरी झंडी मिल चुकी है। कल्याणपुर जंगल, मारकुंडी में मनगवां, बरगढ़ में कस्बा क्षेत्र, मऊ में पूरब पताई व खंडेहा, राजापुर में सरधुआ, पहाड़ी में कौहारी, कर्वी में कालूपुर में नई पुलिस चौकी स्थापित होंगी। 

पाठा से मिट रही डाकुओं की बादशाहत

बबुली कोल और गौरी यादव जैसे इनामी डकैतों समेत आधा दर्जन छुटभैया गिरोह अब सिर उठाने लगे हैं। पाठा को दस्युओं की दुनिया बनाने का आगाज शिव कुमार कुर्मी उर्फ ददुआ ने 1970 के दशक में किया था। रामू पुरवा में 10 लोगों की सामूहिक हत्या समेत कई जघन्य अपराध अंजाम देने वाला ददुआ तीन दशक तक पुलिस को छकाता रहा और पाठा की पहचान बना रहा। 21 जुलाई 2007 को ददुआ और उसके गिरोह के 10 सदस्यों को मानिकपुर जंगलों में एसटीएफ ने मार गिराया। ददुआ के बाद अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया और ज्यादा कुख्यात साबित हुआ। ददुआ ने कभी पुलिस की जान नहीं ली जबकि ठोकिया पुलिस का जानी दुश्मन रहा। उसने एसटीएफ के आधा दर्जन जवानों की सामूहिक हत्या की। बगहिया पुरवा में आधा दर्जन लोगों की ठोकिया ने मारकर फूंक दिया। अंतत: 2008 में ठोकिया पुलिस के हाथों मारा गया। ठोकिया के बाद सुंदर पटेल उर्फ रागिया ने सिर उठाया। बिछियन पुरवा में एक दर्जन लोगों की सामूहिक हत्या के साथ कई जघन्य अपराधों को अंजाम दिया। अगस्त 2012 में यह भी मारा गया। इसके बाद सुदेश पटेल उर्फ बलखड़िया ने पाठा के डाकुओं की कमान संभाली। वह मानिकपुर में पिता-पुत्र समेत चार लोगों की हत्या कर दर्जनों छोटे-बड़े अपराध करता गया । जुलाई 2016 में बलखड़िया भी पुलिस के हाथों मार गिराया गया। राजापुर के जमौली गांव में अकेले दम तीन दिनों तक मुठभेड़ में चार पुलिस कर्मियों को शहीद कर डीआइजी को घायल करने वाला घनश्याम केवट 19 जून 2009 को मुठभेड़ में मारा गया। इसके पहले जून 2006 में शंकर केवट को पुलिस ने मार दिया था। बांदा के नरैनी क्षेत्र में नवोदित राजा सिंह को तो गांव वालों ने ही ढेर कर दिया। बीते माह जुलाई के अंत में एक लाख के इनामी गोप्पा यादव को चित्रकूट में एसटीएफ ने जिंदा दबोच कर जेल में डल दिया था। कुछ दिन पहले ही  50 हजार के इनामी ललित पटेल को एमपी पुलिस ने मार गिराया। पाठा के निही चिरैया गांव में बबुली कोल गैंग से मुठभेड़ में राजू कोल समेत तीन डकैत जिंदा गिरफ्तार किए गए।

Posted By: Nawal Mishra