जागरण संवाददाता, चित्रकूट : दीनदयाल शोध संस्थान के तुलसी कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां में पहाड़ी विकास खंड के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों का क्षमता संवर्धन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। प्रधान ग्राम विकास के साथ-साथ उन्नत तकनीकों का प्रयोग करके खेती का विकास भी कर सकें।

पं. दीनदयाल उपाध्याय व भारत रत्न नानाजी देशमुख के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन करके कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक जाटव ने ग्राम प्रधानों को ग्राम के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। कहा कि जो आवश्यकता के अनुरूप जनता की पहल के आधार पर विकास कार्य में लगे हुए हैं, लेकिन प्रधान बनने के बाद खेती पर ध्यान देना बंद कर देते हैं। जरूरत इस बात की है कि ग्राम प्रधानों को अनुसंधान केंद्रों व कृषि विज्ञान केंद्र से खेती की नवीनतम तकनीकों को सीखकर ग्रामवासियों को अवगत कराएं। जिससे वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो सके। ग्राम पंचायत स्तर पर प्रधान की देखरेख में पशु आश्रय केंद्र खोले गए हैं लेकिन उनकी देखरेख सुचारू रूप से नहीं की जाती है, इसके लिए ग्राम प्रधान उत्तरदायी है। रबी की बुवाई के पूर्व समस्त पशु आश्रय केंद्रों की समुचित व्यवस्था मरम्मत आदि कराकर बेसहारा पशु रखे जाए।

डीआरआइ के संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि ग्राम प्रधान पंचायत का प्रमुख होता है संपूर्ण ग्राम के विकास की जिम्मदारी आपसी मतभेद को भूलकर शासन की समस्त योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचाए । भारत रत्न नानाजी गांव को स्वावलंबी बनाने के लिए हम सब लोगों को पांच सूत्र बताये थे कि कोई गरीब न रहे, कोई बेकार न रहे, कोई बीमार न रहे, कोई अशिक्षित न रहे, विवादमुक्त एवं हराभरा स्वच्छ गांव हो। ब्लाक प्रमुख पहाड़ी सुशील द्विवेदी, केंद्र प्रमुख डा. चंद्रमणि त्रिपाठी, विज्ञानी ममता त्रिपाठी, कमला शंकर शुक्ला, डा. गोविद कुमार वर्मा, ग्राम प्रधान बाबूपुर कुलदीप सिंह ने अपने विचार रखे।

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