जागरण संवाददाता, चित्रकूट : जिले में विश्वकर्मा जयंती के भरतकूप क्रशर मंडी समेत लोक निर्माण विभाग, सिचाई, लघु सिचाई आदि यांत्रिकी कार्यालयों में श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाई गई। भगवान विश्वकर्मा की पूजन किया गया।

जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय ने कहा कि मनुष्य के जीवन में विविध भौतिक वस्तुओं की आवश्यकता होती है और उन वस्तुओं की आपूर्ति समाज के विभिन्न पारंपरिक कारीगरों, हस्तशिल्पयों द्वारा निर्मित वस्तुओं से होता है आज के मशीनरी एवं वैज्ञानिक युग में औद्योगिकीकरण से प्रदेश की परंपरागत शिल्प का ह्रास होता जा रहा है जबकि परंपरागत शिल्पियों की दैनिक जीवन में अति आवश्यकता है प्रदेश में विभिन्न वर्गों के परंपरागत कारीगर शिल्प को बढ़ावा देने तथा लोगों को स्वरोजगार देने के उद्देश्य से ही प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के पारंपरिक कारीगरों बढ़ाई, लोहार, दर्जी, टोकरी बुनकर, नाई, सुनार, कुम्हार, हलवाई, जूते चप्पल बनाने वाले आदि स्वरोजगारियों तथा पारंपरिक हस्तशिल्पयों की कलाओं के प्रोत्साहन एवं संवर्धन तथा उनकी आय में वृद्धि के अवसर उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना लागू किया है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में अन्य प्रदेशों में काम करने वाले उत्तर प्रदेश के कारीगरों, श्रमिकों के वापस आने पर अब उन्हें बेरोजगारी की समस्या न आए। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना बड़ी मददगार साबित हो रही है। इस योजना से छह दिन का नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर उनके स्वयं के कारोबार स्थापित करने के लिए सहायता दे रही है। योजना के लाभ को आवेदन पत्र भरते समय आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक पासबुक खाता नंबर की कॉपी, निवास प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, राशन कार्ड प्रति जैसे दस्तावेज साथ में संलग्न करने होते हैं।

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