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चित्रकूट दीपदान मेले से जगी कुम्हारों की आस, 500 परिवार बना रहे 40 लाख दीये

Published: Thu, 29 Oct 2026 06:16 PM (IST)

चित्रकूट में 40 लाख श्रद्धालुओं के दीपदान मेले से 500 कुम्हार परिवारों की उम्मीदें बढ़ी हैं।

दीयों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए दिन-रात काम कर रहे।

दीयों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए दिन-रात काम कर रहे।

HighLights

  1. 40 लाख से अधिक श्रद्धालु दीपदान मेले में आएंगे।

  2. 500 कुम्हार परिवार दिन-रात दीये बना रहे हैं।

  3. कम मुनाफे के बावजूद पारंपरिक हुनर को बढ़ावा।

जागरण संवाददाता, चित्रकूट। 5 दिवसीय दीपदान मेले में 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना ने कुम्हारों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। मंदाकिनी के घाटों और कामदगिरि में दीपदान के लिए दीयों की मांग को देखते हुए कारीगर दिन-रात चाक चला रहे हैं। हालांकि, मेहनत और लागत के मुकाबले कम कमाई उनके सामने चुनौती बनी हुई है। कारीगरों के मुताबिक, सौ दीये बनाने में 50 से 80 रुपये तक खर्च आता है, जबकि बिक्री 100 रुपये सैकड़ा की दर से होती है।

कर्वी माफी, शंकर बाजार, द्वारिकापुरी, मछरिहा, भरथौल, शिवरामपुर और सीतापुर सहित मध्य प्रदेश के नयागांव क्षेत्र में करीब पांच सौ परिवार मिट्टी के दीये और बर्तन बनाने के काम से जुड़े हैं। दीपदान मेले को देखते हुए इन परिवारों ने उत्पादन तेज कर दिया है।

गल्ला मंडी के पास रहने वाले सिपाही लाल प्रजापति ने बताया कि दीये बनाने के लिए कोलगदईया से मिट्टी खरीदकर लाते हैं। मिट्टी को पानी से भिगोकर नरम किया जाता है। फिर उसे गूंथकर चाक पर आकार देते हैं। सूखने के बाद दीयों को पकाया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष दो लाख दीये बनाए थे। इस बार अब तक एक लाख दीये तैयार हो चुके हैं और दीपावली तक दो लाख दीये बनाने का लक्ष्य है।

कारीगरों के लिए दीपदान मेला पारंपरिक हुनर और कारोबार को आगे बढ़ाने का अवसर है। मेले में आने वाले श्रद्धालु कम से कम पांच दीये जलाकर दीपदान करते हैं। इसके अलावा घरों में भी बड़ी संख्या में दीये जलाए जाते हैं। इनकी आपूर्ति स्थानीय कुम्हार परिवार ही करते हैं।

शंकर बाजार के कारीगर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि दीपदान मेले में दीयों की मांग बढ़ने की उम्मीद हैं। मिट्टी खरीदने से लेकर दीये तैयार करने तक काफी मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में बिक्री अच्छी होने और मेहनत का उचित मूल्य मिलने से परिवारों को राहत मिलेगी। मुन्नीलाल कारीगर का कहना है कि मिट्टी के दीये बनाना हमारे पारंपरिक कारोबार का हिस्सा है। दीपदान मेले के दौरान काम बढ़ जाता है और परिवार के सभी सदस्य दीये बनाने में जुट जाते हैं। उम्मीद है कि इस बार अच्छी बिक्री होगी।

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