चित्रकूट, जागरण संवाददाता : जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय विद्या का अनूठा मंदिर है। यहां वे बच्चे पढ़ते हैं जिनका तिरस्कार उनके अपनों ने कर दिया है। विकलांगों की प्रतिभा और योग्यता में कोई कमी नहीं होती। इतिहास में ऋषि अष्ठावक्र व सूरदास जी का इसका उदाहरण हैं। जो विकलांग हैं उनकी सेवा करना हम सबकी जिम्मेदारी है।

यह बात विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने विकलांग विवि के स्थापना दिवस के अवसर पर कहीं। उन्होंने कहा कि अपूर्ण को शिक्षा के बल पर पूर्ण बनाना इससे बढ़ी समाज सेवा कोई नहीं है। अच्छे कार्य में बाधाएं आती है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने देश के विकलांगों के लिए विकास का द्वार खोला है। शिक्षा के बल पर विकलांगजन बड़ी से बड़ी समस्याओं पर विजय पा सकते है। जगद्गुरु ने वह कार्य किया है जो बड़े-बड़े उद्योगपति और सरकार नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि इस विवि के विकास के लिए वह संसाधनों की व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री से बात करेंगे। कुलाधिपति जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि यह विश्वविद्यालय अतिशीघ्र केंद्रीय विश्वविद्यालय बने। देश के 10 करोड़ विकलांग जब तक शिक्षित नहीं हो जाते वह चैन से नहीं बैठेंगे। कुलपति प्रो. बी पांडेय ने कहा कि इस विवि से पढ़ लिख कर हजारों विकलांग नौकरी, धंधा, स्वरोजगार करते हुए अपना परिवार चला रहे हैं। इस अवसर पर कुलाधिपति की निजी सचिव डा. गीता मिश्रा, लोहिया वाहिनी के प्रदेशाध्यक्ष निर्भय सिंह पटेल, जिलाध्यक्ष राज बहादुर सिंह, डा. आर्या प्रसाद, प्रो.योगेश चंद्र, मनोज पांडेय, रमापति, हेमराज चतुर्वेदी, रविशंकर आदि मौजूद रहें।

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