जासं, चकिया (चंदौली) : स्वच्छता को लेकर सरकार करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही। गांव-गांव में शौचालय का निर्माण कराया जा रहा लेकिन परिषदीय विद्यालयों के बदहाल शौचालय की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। नतीजा दर्जनों प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के शौचालय निष्प्रयोज्य होने से छात्र समेत शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी शिक्षिकाओं व छात्राओं को होती है।

विकास क्षेत्र के 123 प्राथमिक व 53 पूर्व माध्यमिक विद्यालय के अधिकांश शौचालयों की स्थिति दयनीय है। परिषदीय विद्यालय के शौचालयों की ओर नजर दौड़ाए तो डकही, भूसिया, कुदरा, भरेहटा कला, कुंडा हेमैया, टकटकपुर, गायघाट, सुरथापुर जीयनपुरां, लठिया कला, मुबाकरपुर, हिनौती दक्षिणी, सदापुर, जोगिया कला, चितौड़ी समेत 52 प्राथमिक व रतिगढ़, सदापुर, जीयनपुरा, गायघाट, प्रभु नारायनपुर, मुडहुआ दक्षिणी, दुबेपुर माफी आदि 22 पूर्व माध्यमिक विद्यालय का शौचालय निष्प्रयोज्य है। वहीं टंकी व टोटी गायब हैं। ग्रामीणों का आरोप कि प्रधानाध्यापक व जनप्रतिनिधि इसके लिए जिम्मेदार हैं।

--------

निष्प्रयोज्य शौचालयों को दुरुस्त करने के लिए ग्राम प्रधानों को निर्देशित किया गया है। कई ग्राम प्रधानों ने विद्यालयों के शौचालयों की मरम्मत कराना शुरू कर दिया है। जहां कहीं प्रधान गंभीर नहीं है। उन्हें कड़े निर्देश दिए गए हैं ।

सरिता सिंह, बीडीओ

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस