जागरण संवाददाता, चंदौली : लोकसभा चुनाव के दौरान गुलजार रहने वाले राजनीतिक दलों के कार्यालयों में मतगणना के दूसरे दिन शुक्रवार को चहल-पहल नहीं दिखी। कार्यकर्ता चुनाव की थकान मिटा रहे। इससे कार्यालयों में सन्नाटा पसरा दिखा। इक्का-दुक्का कार्यकर्ता तपती दोपहरी में आराम फरमाते मिले।

10 मार्च को लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद से ही राजनीतिक दलों के दफ्तरों की रौनक बढ़ गई थी। हर वक्त कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहता था। पार्टी प्रत्याशी घोषित के बाद तो प्रचार-प्रसार की रणनीति बनाने व अन्य मुद्दों पर चर्चा को दिन में कइयों बार कार्यकर्ताओं की मीटिग होती थी। इसके अलावा पार्टी के स्टार प्रचारकों व राजनीतिक दिग्गजों की सभाओं की तैयारियों को लेकर भी लोगों की आम दरफ्त दिखती रही। लेकिन चुनाव बीतने के बाद दफ्तर सूने हो गए हैं। सपा कार्यालय :

लोकसभा चुनाव में पराजय के बाद मुख्यालय स्थित सपा कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। कार्यालय में रखवाली करने वाले एक-दो लोग ही मौजूद रहे। इसके अलावा पार्टी का कोई सक्षम पदाधिकारी अथवा कार्यकर्ता नहीं मौजूद था। पूछने पर पता चला कि सुबह से कोई नहीं आया था। पदाधिकारी व कार्यकर्ता क्षेत्र में होंगे।

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भाजपा कार्यालय :

कड़े मुकाबले में भाजपा ने संसदीय सीट से दोबारा जीत हासिल की। लेकिन मतगणना से अगले दिन ही संसदीय कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। वहां कोई मौजूद नहीं था। आसपास के लोगों ने बताया कि सुबह से किसी भी कार्यकर्ता अथवा पदाधिकारी ने इधर का रुख नहीं किया।

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जअपा कार्यालाय :

भाजपा व सपा-बसपा गठबंधन को लोस चुनाव में तगड़ी टक्कर देने का मंसूबा पालकर चुनाव मैदान में उतरीं जन अधिकार पार्टी की कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के चुनावी कार्यालय में भी सन्नाटा पसर गया। टेंट, तंबू उखड़ गए। वहीं बैनर-पोस्टर समेत अन्य चुनावी सामग्री हटाई जाने लगी।

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Posted By: Jagran