चंदौली में संचालित काल सेंटर से जापान और चीन के बुजुर्गों से करते थे जालसाजी, चल रहा था अवैध अंतरराष्ट्रीय साइबर काल सेंटर
चंदौली में एक अंतरराष्ट्रीय साइबर कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ है, जहाँ से जापान और चीन के बुजुर्गों को निशाना ...और पढ़ें
HighLights
चंदौली में अंतरराष्ट्रीय साइबर कॉल सेंटर का भंडाफोड़।
जापान और चीन के बुजुर्गों को बनाते थे निशाना।
पांच गिरफ्तार, 9 लाख रुपये फ्रीज, मुख्य सरगना फरार।
जागरण संवाददाता, चंदौली। स्वाट सेल और सर्विलांस सेल सहित स्थानीय पुलिस टीम ने स्वागत इलेक्ट्रानिक शोरूम व आदित्य विजन इलेक्ट्रानिक की बिल्डिंग के बगल में स्थित बिल्डिंग (कैलाशपुर में स्थित बेबी फर्स्ट क्राई शोरूम) की तीसरी मंजिल पर संचालित अंतरराष्ट्रीय साइबर काल सेंटर का राजफाश किया है।
पीडीडीयू नगर में संचालित काल सेंटर से जालसाजों ने जापान और चीन के बुजुओं से जालसाजी करते थे। पुलिस टीम ने काल सेंटर प्रबंधक सहित पांच को गिरफ्तार कर लिया है जबकि संचालक सहित तीन की तलाश की जा रही है। उनके पास से 19 मानीटर, छह आईफोन सहित बड़ी संख्या में उपकरण और फर्जी दस्तावेज बरामद किया है।
अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम दहिया ने बताया कि पुलिस टीम मंगलवार की रात बिल्डिंग में पहुंचकर वीडियोग्राफी करते हुए दरवाजा खुलवाकर प्रवेश किया। मौके पर मौजूद सभी कंप्यूटर मानीटर की स्क्रीन पर लाइव काल चल रही थी। इसमें विदेशी भाषा में आवाज सुनाई पड़ रही थी।
इस दौरान काल सेंटर मैनेजर रौनक सिंह निवासी सैदपुर, थाना बेन, जनपद नालंदा, बिहार के दो खाते में नौ लाख रुपये को तत्काल फ्रीज कराया गया। साथ ही रोशन कुमार निवासी नया बाईपास, थाना विष्णुपथ, जनपद गया, अमन कुमार निवासी मंगला बोरिंग, थाना विष्णुपथ, जनपद गया, अंकित कुमार निवासी नीमडीह, थाना रूपौ, जनपद नवादा और विकास वैभव निवासी वारिस नगर रामशिला, थाना कोतवाली, जनपद गया (बिहार) को गिरफ्तार कर लिया गया।
नालंदा में सीखी थी जापानी भाषा
गिरफ्तारी के बाद कड़ाई से पूछताछ में आरोपितों ने पुलिस को बताया कि वह जापानी भाषा नालंदा व गया में सीखे थे। वह ZOIPER5 ऐप के माध्यम से जापान के नागरिकों के सिस्टम-कंप्यूटर में आई समस्याओं के बहाने रिमोट एक्सेस प्राप्त करते थे। इसके लिए वह जापान की वेबसाइट ([www.oty.com](https://www.oty.com), LogMeInRescueConsole) खोलकर 6-डिजिट का पिन दर्ज करने को कहते थे।
पिन डालते ही स्क्रीन का रिमोट एक्सेस मिल जाता था, जिसके बाद वे पीड़ित के बैंकिंग ऐप को एक्सेस करके धनराशि धोखे से प्राप्त कर लेते थे। प्राप्त बैंकिंग विवरण को अपने व्हाट्सएप ग्रुप्स (जैसे DATES व अन्य वर्चुअल नंबरों वाले ग्रुप) में अन्य साथियों के साथ साझा किया जाता था। चाइनीज मेंबर्स म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, जिनमें पैसा ट्रांसफर किया जाता था।
बताया कि इस पूरे गैंग का मुख्य सरगना एक अन्य साथी है, जो पुलिस के आने से कुछ देर पहले ही निकल गया था। हवाला के जरिए जापानी करेंसी को भारतीय रुपयों में बदलकर वही काल सेंटर चलाता था। पहचान छिपाने के लिए बनारस के पते पर फर्जी आधार कार्ड भी बनवाए थे।
कैसे करते थे जालसाजी
- जापान के बुजुर्ग नागरिक ऐसे लोग थे जो तकनीक से कम परिचित हैं, लेकिन जिनके बैंक खातों में जीवन भर की जमा-पूंजी है। ठग किसी साधारण सिम से नहीं, बल्कि विदेशी सर्वर पर चलने वाले इंटरनेट कालिंग साफ़्टवेयर (VoIP) से काम करते थे। इससे न उनकी असली लोकेशन पता चलती थी, न भारत का नंबर दिखता था। इस साफ़्टवेयर पर जापान ( 81) का नंबर दिखाता था और लगभग हर तीन-चार मिनट में एक नया शिकार बनाते थे।
- फ़ोन पर ठग खुद को कंप्यूटर या बैंक का टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताते थे। भरोसा जमाने के लिए वे विदेशी नाम इस्तेमाल करते थे और पीड़ित के कंप्यूटर पर इसी नाम का एक नकली फ़ोटो-पहचान पत्र तक खोलकर दिखाते थे।
- -रिमोट एक्सेस के जरिए पीड़ित को एक सपोर्ट वेबसाइट खोलकर रिमोट एक्सेस साफ्टवेयर इंस्टाल करने को कहा जाता था। रिमोट की एक्सेस लेने पर साइबर ठग की अपने स्क्रीन पर क्या खुलेगा, क्या बंद होगा, सब साइबर ठग तय करता था, जबकि पीड़ित को लगता था कि उसकी 'मदद' हो रही है।
- साइबर ठग 'वेरिफ़िकेशन' के नाम पर पीड़ितों का वेबकैम चालू करवाकर उन्हें कैमरे के सामने बैठाते थे। बरामद तस्वीरों में कई बुजुर्ग कैमरे में झांकते दिख रहे हैं, तो कई अपने मोबाइल की स्क्रीन कैमरे की ओर घुमाए हुए हैं। यानी पीड़ित के चेहरे से लेकर उसके घर के कमरे तक, सब कुछ ठगों की नज़र में।
- रिमोट कनेक्शन चालू रहते हुए पीड़ितों से उनकी इंटरनेट बैंकिंग और बैंकिंग ऐप में लॉग-इन करवाया जाता था। कुछ खातों में लाखों येन जमा रहते थे।
