जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली): यात्री सुविधाओं में बढ़ोत्तरी का दावा करने वाले रेल प्रशासन का दूसरा चेहरा भी सामने आया है। अधिकारियों की नाक के नीचे जंक्शन स्थित स्टालों पर बिकने वाले सामानों को निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बेचा जा रहा है। पंद्रह रुपये मूल्य का रेल नीर खुलेआम 20 रुपये में यात्रियों को दिया जाता है। वहीं अन्य खाद्य सामग्रियों को भी फुटकर का बहाना बनाकर अधिक मूल्य पर बेचा जा रहा है। प्रतिदिन मूल्य को लेकर यात्रियों और संचालकों के बीच किचकिच होती है। लेकिन मनबढ़ संचालक बगैर रोकटोक के बेखौफ होकर अपना काम कर रहे हैं। और तो और कई स्टालों पर रेट बोर्ड या रेल लिस्ट भी नहीं लगाई गई है, जो विभागीय लापरवाही की कहानी बयां करने के लिए काफी है।

आरा से दिल्ली की यात्रा कर रहे श्यामजीत, पाटलिपुत्र एक्सप्रेस के यात्री मोहम्मद आलम, मुकेश कुमार ने बुधवार को जंक्शन के स्टालों से रेल नीर खरीदा। बोतल पर पंद्रह रुपये अंकित थे जबकि उनसे बीस रुपये लिए गए। विरोध किया तो संचालकों के बताया कि पानी की ढुलाई और उसे ठंडा करने के एवज में पांच रुपये अतिरिक्त लिए जा रहे हैं। यात्रियों ने शिकायत करने की बात कहीं तो उनके पैसे वापस किए गए। दरअसल यह जंक्शन पर प्रतिदिन की कहानी है। स्टाल संचालक कभी फुटकर न होने का बहाना तो कभी ढुलाई का खर्च बताकर यात्रियों की जेब पर डाका डाल रहे हैं। इनकी मनमानी को जिम्मेदारों की मौन सहमति प्राप्त है। सूत्रों की मानें तो स्टालों पर चल रहे खेल से हर कोई वाकिफ है। लेकिन अधिकारी बेफिक्र बने हुए हैं। मुनाफे में बंदरबांट पर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है और बात रेलवे के उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती है। यही नहीं प्लेटफार्म संख्या चार के उत्तरी छोर पर एक स्टाल बगैर रेट बोर्ड के संचालित हो रहा है। इस बाबत सीएसजी एके अनिल का कहना है कि यात्रियों की शिकायत पर कार्रवाई की जाती है। गाहे-बगाहे अभियान भी चलाया जाता है। संचालकों को रेट बोर्ड लगाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। ऐसा नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा।

Posted By: Jagran

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