जागरण संवाददाता, चंदौली : धान के कटोरे में मिट्टी की सेहत दिनोंदिन खराब होती जा रही है। रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा घटती जा रही है। मिट्टी में जीवांश कार्बन, जिक, सल्फर आदि पोषक तत्व न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुके हैं। इससे मृदा के बंजर होने का खतरा बढ़ गया है, जबकि बजट के अभाव में मृदा परीक्षण की प्रक्रिया पिछले दो साल से ठप है। इससे किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कृषि उपनिदेशक कार्यालय स्थित मृदा परीक्षण लैब में सन्नाटा पसरा हुआ है। कृषि प्रधान जनपद में मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा लगातार कम होती जा रही है। सूक्ष्म पोषक तत्व भी घट रहे हैं। इसके लिए रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग सबसे बड़ा कारक है। पराली जलाने से भी मित्र कीटों के मरने से ऐसी स्थिति पैदा हुई है। किसान यदि नहीं चेते, तो मिट्टी की उर्वरता घटकर इतनी कम हो जाएगी कि खेती करना घाटे का सौदा साबित होगा। ऐसे में अन्नदाताओं को समय रहते विकल्प तलाशने की जरूरत है। जिले में मृदा परीक्षण के लिए लेबल वन व लेबल टू लैब स्थापित किया गया है। यहां आधुनिक मशीनों के जरिए विशेषज्ञ मिट्टी में जीवांश कार्बन, अम्ल, क्षार, जिक, आयरन, नाइट्रोजन, फास्फेट व पोटाश समेत सामान्य व सूक्ष्म तत्वों की जांच करते हैं। हालांकि पिछले दो साल से केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से मिट्टी की जांच के लिए बजट ही नहीं जारी किया गया। इससे परीक्षण का कार्य ठप है। ऐसे में किसानों को मिट्टी की जांच कराने बीएचयू जाना पड़ता है।

मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति

जिले की मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा प्वाइंट दो से तीन मिल रही है। मानक के अनुरूप इसकी मात्रा प्वाइंट आठ होनी चाहिए। इसी प्रकार सल्फर 12 से 13 किलोग्राम है जबकि प्रति हेक्टेयर 40 किलोग्राम होना चाहिए। पोटाश 125 से 130 किलोग्राम है। इसकी मात्रा 250 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए। सल्फर आठ और नौ पीपीएम (पार्टिकल पर मिलियन) मिल रहा है। इसकी मात्रा कम से कम 15 पीपीएम होनी चाहिए। जिक 1.2 पीपीएम है जबकि इसकी मात्रा तीन से चार पीपीएम होनी चाहिए। वर्जन

'मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में सामान्य व सूक्ष्म तत्वों के जांच की सुविधा है। चिन्हित गांवों में मृदा परीक्षण की सुविधा दी जा रही है। शासन स्तर से बजट मिलने के बाद सभी किसानों को इसका लाभ मिलेगा।

विजेंद्र कुमार, उपनिदेशक, कृषि

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