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150 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में कवच की स्थापना पूरी, संरक्षा तकनीक को मिला विस्तार

By Vivek Kumar Dubey Edited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 18 Sep 2026 05:49 PM (IST)

पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल के विद्युत लोको शेड ने 150 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में स्वदेशी कवच प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य ...और पढ़ें

डीडीयू मंडल में 150 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली स्थापित, रेल संरक्षा को मिला नया आयाम।

डीडीयू मंडल में 150 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली स्थापित, रेल संरक्षा को मिला नया आयाम।

HighLights

  1. डीडीयू लोको शेड ने 150 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में कवच लगाया।

  2. स्वदेशी कवच प्रणाली से रेल संरक्षा तकनीक मजबूत हुई है।

  3. यह आधुनिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली परिचालन को सुरक्षित बनाएगी।

जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली)। रेल संरक्षा को तकनीक से मजबूत करने की दिशा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विद्युत लोको शेड, डीडीयू में 150 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में स्वदेशी कवच प्रणाली लगाने का लक्ष्य पूरा हो गया है। विश्वकर्मा पूजा के दिन 17 सितंबर को 150वें इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में कवच की स्थापना पूरी की गई। इस उपलब्धि से डीडीयू मंडल में आधुनिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के विस्तार को नया आधार मिला है।

विद्युत लोको शेड में 150वें लोकोमोटिव में कवच की स्थापना पूरी होने के अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना मौजूद रहे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को उपलब्धि के लिए बधाई दी। साथ ही आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग के साथ रेल परिचालन को और सुरक्षित बनाने पर जोर दिया। भारतीय रेल में विकसित कवच स्वदेशी स्वचालित ट्रेन संरक्षा प्रणाली है।

इसका उद्देश्य ट्रेन परिचालन के दौरान लोको पायलट को सिग्नल और निर्धारित गति के अनुपालन में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना है। प्रणाली लोकोमोटिव, ट्रैक पर लगे उपकरणों, स्टेशन तथा इंटरलॉक्ड रेलवे क्रॉसिंग गेट जैसे स्थिर उपकरणों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करती है। ट्रेन की गति, स्थिति और सिग्नल की जानकारी के आधार पर यह लोको पायलट को आवश्यक चेतावनी देती है। निर्धारित परिस्थितियों में स्वत: ब्रेक लगाने में भी सहायता करती है।

करीब 100 ट्रेनों में हो रहा उपयोग
डीडीयू मंडल के गंजख्वाजा-भभुआ रोड तथा सासाराम-पहलेजा सेक्शन में वर्तमान में कवच प्रणाली से युक्त लोकोमोटिव वाली करीब 100 ट्रेनों का प्रतिदिन आवागमन हो रहा है। इससे स्पष्ट है कि कवच अब केवल स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि परिचालन में भी इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। तकनीक के विस्तार से सिग्नल पार करने जैसी जोखिमपूर्ण स्थिति में चेतावनी और आवश्यकतानुसार स्वचालित ब्रेकिंग की मदद मिलती है।

चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा रहा कवच का दायरा
विद्युत लोको शेड, डीडीयू में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को कवच से लैस करने का काम लगातार जारी है। 150वें लोकोमोटिव में स्थापना पूरी होना इसी अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव है। विश्वकर्मा पूजा के दिन यह उपलब्धि हासिल होना शेड के तकनीकी कार्यबल के लिए भी खास रहा। रेलवे में बढ़ती तकनीकी जरूरतों के बीच लोकोमोटिव में आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का विस्तार परिचालन की विश्वसनीयता बढ़ाने में सहायक माना जा रहा है।

कवच प्रणाली के माध्यम से ट्रेन की गति और सिग्नल से जुड़ी सूचनाओं की लगातार निगरानी होती है। ऐसे में लोको पायलट को समय रहते चेतावनी मिलने के साथ निर्धारित परिस्थितियों में ब्रेकिंग सहायता उपलब्ध होती है। इससे सिग्नल उल्लंघन तथा टक्कर जैसी जोखिमपूर्ण परिस्थितियों से बचाव में मदद मिलती है। डीडीयू लोको शेड में 150 लोकोमोटिव तक पहुंचे कवच के विस्तार को इसी तकनीकी बदलाव की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।