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भारत-जापान औद्योगिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, एमएसएमई पर फोकस

By Vivek Kumar Dubey Edited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 27 Aug 2026 03:36 PM (IST)

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जापान का दौरा कर भारत-जापान के आर्थिक रिश्तों को नई ...और पढ़ें

भारत-जापान औद्योगिक संबंधों को मिलेगी नई गति एमएसएमई क्षेत्र पर विशेष ध्यान।

भारत-जापान औद्योगिक संबंधों को मिलेगी नई गति एमएसएमई क्षेत्र पर विशेष ध्यान।

HighLights

  1. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल जापान पहुंचा।

  2. एमएसएमई सहयोग, कौशल विकास और जापानी निवेश पर जोर दिया गया।

  3. चंदौली के नंदलाल अग्रवाल ने एमएसएमई साझेदारी की वकालत की।

जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली)। भारत-जापान के आर्थिक रिश्तों को औद्योगिक साझेदारी की नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। 24 से 27 अगस्त तक केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में जापान पहुंचे भारतीय बिजनेस डेलिगेशन में चंदौली के युवा उद्योगपति नंदलाल अग्रवाल भी शामिल रहे।

चार दिवसीय दौरे के अंतिम दिन कंसाई क्षेत्र में भारत-जापान व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने, सेक्टर आधारित औद्योगिक प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही बढ़ाने, कौशल विकास व एमएसएमई सहयोग को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। जापानी कंपनियों को भारत में निवेश, संयुक्त विनिर्माण व भारतीय कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग के लिए आमंत्रित किया गया।

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इस दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत व जापान के बीच ऐतिहासिक और व्यक्तिगत संबंध हैं। कंसाई क्षेत्र के साथ भारत के रिश्ते विशेष महत्व रखते हैं। अब इन संबंधों को आर्थिक व औद्योगिक स्तर पर और मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप सेक्टर-विशिष्ट प्रतिनिधिमंडलों का आदान-प्रदान बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि कारोबारी चर्चाओं को ठोस साझेदारी में बदला जा सके।

जापान में तकनीकी कौशल की बढ़ती मांग को भारत के लिए बड़ा अवसर बताते हुए मंत्री ने जापानी औद्योगिक मानकों के अनुरूप भारत में प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित करने की बात कही। युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण के साथ जापानी भाषा का ज्ञान देकर कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर बल दिया गया। इससे भारत-जापान उद्योगों के बीच रोजगार व कौशल का मजबूत सेतु तैयार हो सकेगा।

भारत की युवा आबादी को जापान के लिए बड़ी संभावना बताया। भारत की औसत आयु करीब 29 वर्ष, जबकि जापान की करीब 50 वर्ष है। ऐसे में भारत की युवा मानवशक्ति जापान की बढ़ती कुशल श्रम आवश्यकता पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जापान की तकनीक, गुणवत्ता व औद्योगिक अनुभव के साथ भारत की युवा शक्ति, बड़ा बाजार व उत्पादन क्षमता का मेल दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को नई गति दे सकता है।

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गुणवत्ता व समय पर आपूर्ति बने आधार
भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए गुणवत्ता तथा समयबद्ध आपूर्ति पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई गई। जापानी बाजार में भारतीय प्रोसेस्ड फूड की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। जापानी गुणवत्ता व खाद्य मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार कर निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया गया।

एमएसएमई साझेदारी पर नंदलाल का जोर
दौरे के दौरान चंदौली के युवा उद्योगपति नंदलाल अग्रवाल ने जापानी कंपनियों व प्रतिनिधियों से संवाद किया। उन्होंने जापानी उद्योगों को भारत आने, भारतीय कंपनियों के साथ सहयोग करने तथा संयुक्त रूप से विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने का आमंत्रण दिया। अग्रवाल ने भारत-जापान साझेदारी में एमएसएमई क्षेत्र को प्रमुख आधार बनाने की पैरवी की। उनका कहना रहा कि अब तक बड़ी कंपनियों के बीच सहयोग पर अधिक चर्चा हुई है, जबकि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।