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नेपाल की त्रासदी में मौत को करीब से देखा, अब अपनों के बीच लौटे 105 यात्रि‍यों ने बताई दहशत की दास्‍तान, डीडीयू में मिला सहारा

By Vivek Kumar Dubey Edited By: Abhishek sharma
Published: Sat, 29 Aug 2026 11:35 AM (IST)

नेपाल में त्रासदी का सामना करने के बाद नागपुर के 105 श्रद्धालु सुरक्षित भारत लौटे हैं। पीडीडीयू जंक्शन पर रेलवे ...और पढ़ें

HighLights

  1. नेपाल त्रासदी से 105 नागपुर श्रद्धालु सुरक्षित लौटे।

  2. पीडीडीयू जंक्शन पर रेलवे ने की स्वास्थ्य जांच।

  3. यात्रियों ने भारत सरकार और रेलवे का जताया आभार।

जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली)। नेपाल में शिवपुराण की कथा सुनने गए नागपुर महाराष्ट्र के 105 श्रद्धालु शनिवार को सकुशल अपने घर लौटने की राह पर हैं। नेपाल में आई त्रासदी के दौरान मौत को करीब से देखने वाले यात्रियों के चेहरों पर थकान थी तो आंखों में भयावह मंजर की तस्वीरें अब भी ताजा थीं। नेपाल से रेस्क्यू कर भारत लाए गए सभी यात्री पटना पहुंचे।

यहां से 17609 पूर्णा एक्सप्रेस से नागपुर के लिए रवाना हुए। ट्रेन के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंचने पर रेलवे की ओर से यात्रियों की स्वास्थ्य जांच के साथ नाश्ते की व्यवस्था की गई। बीई-1 व बीई-2 कोच में सवार हैं 105 यात्री। लंबी यात्रा के बावजूद यात्रियों में अपनों से मिलने की बेसब्री साफ दिखी।

नेपाल में धार्मिक यात्रा के दौरान अचानक आई त्रासदी ने श्रद्धालुओं के लिए जिंदगी का सबसे खौफनाक अनुभव छोड़ दिया। किसी ने सुरक्षित स्थान पर छिपकर जान बचाई तो कोई मलबे के बीच फंस गया। कई यात्रियों ने घंटों तक मदद का इंतजार किया। रेस्क्यू टीम के पहुंचने के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया।

रंदीना, जयराम व नागेश ने सुनाई आपबीती
नागपुर महाराष्ट्र की रंदीना कुमारी, जयराम दुबे व नागेश त्रिपाठी भी इन 105 यात्रियों में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल में धार्मिक कथा सुनने के दौरान किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही देर में हालात इतने भयावह हो जाएंगे। अचानक अफरातफरी मची तो हर तरफ जान बचाने की कोशिश शुरू हो गई। ऐसे समय में समझ नहीं आ रहा था कि किस दिशा में जाएं।

किसी तरह सुरक्षित स्थान तलाशकर जान बचाई। यात्रियों ने बताया कि त्रासदी के बाद कई घंटे तक भय के माहौल में गुजरना पड़ा। आसपास मलबा, चीख-पुकार और मदद की प्रतीक्षा के बीच हर पल जिंदगी पर भारी था। एक-दूसरे का हाथ थामकर हिम्मत बनाए रखी। रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला तो लगा कि जिंदगी दोबारा मिल गई है। भारत की सीमा में पहुंचने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली।

प्रधानमंत्री व रेल मंत्री का जताया आभार
रंदीना कुमारी, जयराम दुबे व नागेश त्रिपाठी सहित अन्य यात्रियों ने भारत सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार जताया। कहा कि संकट की घड़ी में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालकर स्वदेश लाने के लिए जिस तरह प्रयास किए गए, वह सराहनीय है। यात्रियों ने कहा कि घर पहुंचने के बाद ही इस भयावह अनुभव से पूरी तरह उबर सकेंगे।

डीडीयू में दिखा रेलवे का मानवीय चेहरा
105 यात्रियों के डीडीयू पहुंचने की सूचना के बाद रेलवे ने चिकित्सा टीम को सक्रिय रखा। यात्रियों की स्वास्थ्य जांच की गई। किसी यात्री को तत्काल उपचार की आवश्यकता पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था रही। इसके साथ ही यात्रियों के लिए नाश्ते का इंतजाम किया गया। रेलवे की ओर से की गई व्यवस्थाओं को यात्रियों ने सराहा।

डीडीयू जंक्शन पर ठहराव इन यात्रियों के लिए सफर का महज एक पड़ाव नहीं रहा। नेपाल की त्रासदी से सुरक्षित निकलने के बाद यहां मिली चिकित्सा सहायता, नाश्ता व रेलवे कर्मियों का सहयोग उन्हें राहत देने वाला रहा। कुछ समय रुकने के बाद 17609 पूर्णा एक्सप्रेस नागपुर की ओर रवाना हो गई। अब यात्रियों की निगाहें अपने घर की ओर हैं, जहां स्वजन बेसब्री से उनका इंतजार कर रहे हैं।