जागरण संवाददाता, चंदौली : मुख्य विकास अधिकारी डा. एके श्रीवास्तव ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कागज का झोला बनाएं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति तो सु²ढ़ होगी ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार की ओर से पालीथिन पर पूर्ण प्रतिबंध है। ऐसे में यदि महिलाएं कागज का झोला व अन्य जरूरत के सामान बनाएंगी तो बाजार में उन्हें उनके उत्पाद का उचित मूल्य भी मिलेगा। वे शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से आयोजित मेगा कैंप में उपस्थित महिलाओं को संबोधित कर रहे थे।

कहा कि गांव की महिलाएं अपने व्यवसाय का स्वयं चुनाव करें। मिशन की ओर से उन्हें संबंधित व्यवसाय के बाबत प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे स्वावलंबी तो बनेंगी ही उनकी आर्थिक स्थिति भी सु²ढ़ होगी। महिलाएं समूह बनाकर गांव में चट्टी, चौराहों पर ढाबा, ब्यूटी पार्लर, स्वेटर बुनाई आदि का कार्य कर सकती हैं। महिलाओं को खेती के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाने की जरूरत है। कस्टम हार्वे¨स्टग के माध्यम से स्वयं की खेती के साथ दूसरों की भी मदद करें। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डा.आरपीएस रघुवंशी ने समूह की महिलाओं को मशरूम की खेती, मधुमक्खी व कुक्कुट पालन करने पर बल दिया। कहा कि वर्तमान परिवेश में महिलाओं को खेती-किसानी की ओर भी अग्रसर होने की जरूरत है। विधायक साधना ¨सह ने कहा कि आजीविका मिशन जनपद में निरंतर प्रगति कर रहा है। महिलाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि स्वयं के परिश्रम से कमाया हुआ धन ज्यादा खुशी प्रदान करता है। उन्होंने मिशन की ओर से विभिन्न विकास खंड के समूह की महिलाओं को 3 करोड़ 61 लाख 40 हजार रुपये का चेक प्रदान किया। कैंप को जिला विकास अधिकारी पदमकांत शुक्ल, परियोजना निदेशक सुशील कुमार ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर समूह की महिलाएं व विभिन्न विकास खंडों के बीडीओ उपस्थित थे। संचालन उपायुक्त स्वत: रोजगार एमपी चौबे ने किया।

Posted By: Jagran

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