जासं, चंदौली : राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण में अधिग्रहित जमीन का भुगतान गलत लोगों को करने के मामले की सदर एसडीएम हीरालाल ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि प्रथम ²ष्टया भूमि अध्याप्ति कार्यालय के कर्मचारी दोषी मिले हैं। कर्मचारियों और एनएच कर्मियों की मिलीभगत से जिसकी एक इंच जमीन नहीं थी उसका 104 वर्ग मीटर भूमि दिखाकर 13 लाख भुगतान कर दिया गया। जबकि जिसके नाम भूमि है उसे फूटी कौड़ी तक नहीं दी गई। हालांकि मामले की जांच चल रही, एसडीएम पूरी रिपोर्ट डीएम को शनिवार को सौंपेंगे। प्रकरण में कुछ अधिकारी और कई कर्मचारी लपेटे में आएंगे।

2010 में सदर तहसील के बिरैली नौबतपुर मौजा में हाईवे चौड़ीकरण को जमीन का अधिग्रहण किया गया था और इसका भुगतान 2016 में किया गया। इस बीच कई बार आपत्तियां भी आईं लेकिन विभाग ने कोई तवज्जो नहीं दी। जांच के दौरान एसडीएम की जांच में उजागर हुआ कि जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया, उसके तीन खातेदारों में दो लोगों ने 2014 में रजिस्ट्री कर दी। जबकि यह रजिस्ट्री नहीं होनी चाहिए थी। लेखपाल की रिपोर्ट में उक्त दो लोगों की जमीन शून्य दिखाई गई। जमीन न रहने के बाद भी उन्हें 2016 में 13 लाख का भुगतान आवासीय भवन दिखाते हुए किया गया। भूस्वामी दीनानाथ के परिवार के लोगों ने जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया गया था कि राजस्व विभाग ने भू स्वामी को दरकिनार कर दिया और जिनकी भूमि नहीं थी उन्हें अधिग्रहित भूमि का भुगतान कर दिया। डीएम ने मामले का संज्ञान लिया और सदर एसडीएम को पूरे प्रकरण की जांच कर दो दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। शुक्रवार को एसडीएम ने भूमि अध्याप्ति कार्यालय के संबंधित कर्मियों को भुगतान व सभी अभिलेखों के साथ तलब किया तो मामला उजागर हुआ। ''नौबतपुर के बिरैली गांव में हाईवे के लिए अधिग्रहित जमीन के भुगतान में घोर अनियमितता मिली। भुगतान गलत ढंग से किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच चल रही, दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी, दिए गए पैसों की रिकवरी होगी। जल्द ही रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी।''

-हीरालाल, उप जिलाधिकारी।

Posted By: Jagran

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