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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने बदली माल ढुलाई की रफ्तार, यूपी बना लॉजिस्टिक्स का बड़ा केंद्र

By Vivek Kumar Dubey Edited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 07 Sep 2026 01:20 PM (IST)

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) ने देश की माल ढुलाई व्यवस्था को नई गति दी है, जिससे परिवहन की रफ्तार और ...और पढ़ें

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से यूपी में माल ढुलाई में क्रांतिकारी बदलाव।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से यूपी में माल ढुलाई में क्रांतिकारी बदलाव।

HighLights

  1. डीएफसी ने माल ढुलाई की रफ्तार, समयबद्धता और क्षमता में सुधार किया।

  2. उत्तर प्रदेश डीएफसी का सबसे लंबा हिस्सा, बना प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्र।

  3. नए कार्गो टर्मिनल और सेवाएं आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रही हैं।

जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली)। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूर्ण परिचालन ने देश की माल ढुलाई व्यवस्था की चाल बदल दी है। यात्री ट्रेनों से मालगाड़ियों का मार्ग अलग होने से परिवहन की रफ्तार, समयबद्धता, क्षमता व संचालन की विश्वसनीयता बढ़ी है। भारतीय रेल के कुल नेटवर्क का करीब चार प्रतिशत हिस्सा रखने वाला डीएफसी अब 14 प्रतिशत से अधिक रेल माल ढुलाई संभाल रहा है।

इसका सीधा लाभ उत्तर प्रदेश को मिल रहा है। पूर्व मध्य रेलवे का डीडीयू मंडल ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का प्रमुख हिस्सा होने के कारण पूर्वी भारत से देश के विभिन्न हिस्सों तक माल पहुंचाने की अहम कड़ी बन गया है। 1,337 किमी लंबे ईडीएफसी तथा 1,506 किमी लंबे वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का कुल नेटवर्क 2,843 किमी है।

अगस्त 2026 तक दोनों कॉरिडोर पर 5.21 लाख से अधिक मालगाड़ी यात्राएं पूरी हो चुकी हैं। प्रतिदिन औसतन करीब 435 मालगाड़ियां दौड़ रही हैं। अब तक 658 अरब ग्रॉस टन किलोमीटर (जीटीकेएम) व 360 अरब नेट टन किलोमीटर (एनटीकेएम) का परिचालन दर्ज किया गया है।

डीडीयू मंडल से मिली पूर्वी क्षेत्र को रफ्तार
ईडीएफसी में डीडीयू मंडल की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। सोननगर की ओर से आने वाली माल ढुलाई को उत्तर भारत के बाजारों तक पहुंचाने में यह प्रमुख रेल गलियारा है। कोयला आधारित बिजलीघरों के लिए ईंधन, सीमेंट, खाद्यान्न सहित भारी माल की आवाजाही में डीएफसी ने समय घटाया है। मालगाड़ियों के लिए अलग मार्ग मिलने से पारंपरिक रेलखंड पर परिचालन का दबाव भी कम हुआ है। इसका लाभ यात्री ट्रेनों को अतिरिक्त क्षमता के रूप में मिल रहा है।

यूपी में सबसे लंबा हिस्सा
ईडीएफसी का करीब 1,078 किमी हिस्सा उत्तर प्रदेश से गुजरता है, जो किसी भी राज्य में सबसे लंबा है। डब्ल्यूडीएफसी के 19 किमी हिस्से के साथ प्रदेश देश के प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्रों में तेजी से उभर रहा है। दादरी से पश्चिमी समुद्री बंदरगाहों तक कंटेनर पहुंचाने में लगने वाला समय घटा है। कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी सहित औद्योगिक क्षेत्रों को कच्चे माल की तेज आपूर्ति तथा तैयार उत्पादों की सुगम निकासी का लाभ मिल रहा है। न्यू भाऊपुर, न्यू दाउदखान, न्यू गुलाओठी, न्यू मिर्जापुर व न्यू दादरी में गति शक्ति कार्गो टर्मिनल तथा लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से माल को अंतिम छोर तक पहुंचाने की व्यवस्था और मजबूत होगी।

कंटेनर से ई-कॉमर्स तक बढ़ा दायरा
डीएफसी पर कोयला, स्टील, उर्वरक, अनाज व सीमेंट के साथ कंटेनर, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन व ऑटोमोबाइल की ढुलाई भी बढ़ी है। दूध के परिवहन के लिए ट्रक ऑन ट्रेन (टीओटी) तथा ई-कॉमर्स व पार्सल के लिए जेपीपी-आरसीएस जैसी सेवाओं ने इसके उपयोग का दायरा बढ़ाया है। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में कंटेनर लोडिंग बढ़ने से आय में करीब आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

पीबीसीपी टर्मिनल से चालू वित्त वर्ष में 251 रेक लोड किए गए हैं। न्यू दादरी से जेपीपी-आरसीएस के तहत रोज करीब 10 वीपी लोड हो रहे हैं, जिससे प्रतिदिन करीब 10 लाख रुपये की आय हो रही है। अनाज लदान से इस मद की आमदनी करीब 90 प्रतिशत बढ़ी है।डीएफसी के कारण भारी माल सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित हो रहा है। इससे राजमार्गों पर ट्रकों का दबाव घटने के साथ डीजल खपत में भी कमी आई है। अनुमान है कि अगले 30 वर्षों में करीब 477 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम किया जा सकता है।


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डीएफसी के परिचालन से माल ढुलाई की गति, क्षमता व समयबद्धता बेहतर हुई है। मालगाड़ियों के लिए अलग कॉरिडोर मिलने से पारंपरिक रेल मार्गों पर यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हुई है। तेज कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स में लगने वाला समय व लागत घटाने के साथ माल परिवहन को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद मिली है।

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पवन कुमार राय, डायरेक्टर पीपी, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर