एआई तकनीक से लैस होगा डीडीयू फ्रेट यार्ड, अब मालगाड़ियां खुद बताएंगी अपनी खराबी
पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के फ्रेट यार्ड में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरा प्रणाली स्थापित की जा रही है, ...और पढ़ें


समय कम है?
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जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल मालगाड़ियों की सुरक्षा व रखरखाव व्यवस्था को हाईटेक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है।
डीडीयू जंक्शन स्थित फ्रेट एग्जामिनेशन यार्ड में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित अत्याधुनिक कैमरा प्रणाली स्थापित की जाएगी। इस तकनीक के जरिए मालगाड़ियों के डिब्बों की निगरानी पूरी तरह स्वचालित हो जाएगी। किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी तत्काल पकड़ में आ सकेगी।
रेलवे का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद मालगाड़ियों की सुरक्षा, मरम्मत व परिचालन क्षमता में बड़ा सुधार आएगा। यार्ड में लगाए जा रहे हाई रिजोल्यूशन कैमरे के साथ एआई एनालिटिक्स सिस्टम वैगनों की रियल टाइम मॉनिटरिंग करेंगे। इसके माध्यम से खुले दरवाजे, छेड़छाड़, टूट-फूट, ढांचे में दरार अथवा अनलोडिंग से जुड़ी समस्याओं की स्वतः पहचान हो सकेगी।
अब तक इन कमियों का पता लगाने में कर्मचारियों को काफी समय व श्रम लगाना पड़ता था, लेकिन नई तकनीक लागू होने के बाद मरम्मत कार्य अधिक सटीक और तेज हो जाएगा। इससे मानवीय भूल की संभावना भी काफी हद तक कम होगी।
रेलवे यार्ड में अत्याधुनिक आटोमैटिक व्हील प्रोफाइल मेजरमेंट सिस्टम भी लगाया जा रहा है। लेजर स्कैनर व हाई स्पीड कैमरों से लैस यह तकनीक बिना ट्रेन रोके पहियों की जांच करेगी।
चलती मालगाड़ियों के पहियों की वास्तविक स्थिति का तुरंत विश्लेषण हो सकेगा, जिससे खराबी का पहले ही पता लगाकर हादसों की संभावना कम की जा सकेगी। तकनीक आधारित यह व्यवस्था मालगाड़ियों के सुरक्षित परिचालन में अहम भूमिका निभाएगी।
तकनीकी आधुनिकीकरण के साथ डीडीयू मंडल ने वैगन मरम्मत के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वैगन केयर सेंटर ने एक माह में 3200 बाक्सन वैगनों की भारी मरम्मत कर देश में पहला स्थान हासिल किया है। इसके अलावा 905 बाक्सन वैगनों की रूटीन ओवरहालिंग भी की गई।
रायपुर मंडल के भिलाई डिपो व आसनसोल मंडल के अंडाल डिपो को पीछे छोड़ते हुए डीडीयू मंडल ने यह उपलब्धि हासिल की है। निर्धारित लक्ष्य से 30 प्रतिशत अधिक मरम्मत कार्य पूरा कर मंडल ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
मालगाड़ियों के वैगनों की देखरेख तीन चरणों में होती है। क्लोज सर्किट रैक लगभग 35 दिनों में 10 हजार किलोमीटर माल ढुलाई के बाद परीक्षण के लिए आती है। प्रीमियम रैक की 12 दिनों में जांच होती है, जबकि एंड-टू-एंड रैक का नियमित निरीक्षण अनिवार्य होता है। रेलवे नियमों के तहत प्रत्येक वैगन को साढ़े चार वर्ष में पूरी तरह खोलकर हैवी रिपेयर और डेढ़ वर्ष में रूटीन ओवरहालिंग से गुजरना पड़ता है।
बाक्सन वैगन कोयला, सीमेंट, अनाज समेत विभिन्न थोक वस्तुओं के परिवहन की रीढ़ हैं। समय पर रखरखाव और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी, जिससे रेलवे के राजस्व और परिचालन व्यवस्था दोनों को लाभ मिलेगा। उत्कृष्ट कार्य के लिए वैगन केयर सेंटर के कर्मचारियों को सम्मानित करने का प्रस्ताव भी भेजा गया है।
एआई आधारित प्रणाली लागू होने के बाद वैगनों की जांच अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक होगी। इससे प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस को बढ़ावा मिलेगा तथा किसी भी तकनीकी खराबी की समय रहते पहचान कर उसे दूर किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि नई तकनीक से मालगाड़ियों की सुरक्षा और परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
-नितिन कुमार, वरीय मंडल यांत्रिक अभियंता, डीडीयू रेल मंडल
