जागरण संवाददाता, चंदौली : कोरोना के कहर ने बचपन में ही किसी के सिर से पिता का साया उठा लिया तो किसी से मां की ममता को हमेशा के लिए छीन लिया। कोरोना महामारी में माता-पिता में से किसी एक की मौत से जिले में 56 बच्चे असहाय हो गए हैं। पिता की मौत के बाद बच्चों की परवरिश में मां को दुश्वारियां उठानी पड़ रही है। जिले ऐसे 15 परिवार चिन्हित किए गए हैं। फिलहाल सभी बच्चे अपने घरों में ही रह रहे हैं। सरकार ने ऐसे बेसहारा बच्चों के पालन-पोषण में मदद का जिम्मा उठाया है। इनके खाते में न सिर्फ चार हजार रुपये प्रति माह सरकार देगी, बल्कि मुफ्त शिक्षा और लैपटाप भी दिया जाएगा। सरकार की इस पहल से बेसहारा बच्चों के परिजनों में उनकी परवरिश को लेकर उम्मीद जगी है।

कोरोना से लोगों की मौत के बाद परिवार के अनाथ व बेसहारा बच्चों को शासन के निर्देश के बाद चिन्हित किया गया। हालांकि एक भी बच्चा अनाथ नहीं मिला। 56 बच्चे ऐसे मिले हैं, जिनमें अधिकांश के पिता की संक्रमण की वजह से मौत हो गई। ऐसे में उनकी परवरिश का पूरा दारोमदार अब मां के कंधों पर है। अब तक गृहिणी के रूप में जीवन बिताने वाली मां के सामने बच्चे की बेहतर परवरिश की समस्या खड़ी हो गई है। कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित बच्चे पीडीडीयू नगर के रहने वाले हैं। यहां एक ही परिवार में दो लोगों की कोरोना से मौत हो गई। सभी पुरुष सदस्य रहे। कमाऊ लोगों की मौत से घर-गृहस्थी का गाड़ी का पहिया थम गया है। छोटे-छोटे बच्चे माता-पिता में किसी एक के साथ रह तो रहे हैं, लेकिन परिवार की आय खत्म होने से संकट छा गया है। केस एक

एक ही परिवार के दो सदस्यों को खोया

पीडीडीयू नगर निवासी एक परिवार में कोरोना संक्रमण की वजह से दो लोगों की मौत हो गई। दोनों भाइयों की कमाई की बदौलत परिवार चलता था। उनके जाने के बाद परिवार की कमाई पर ग्रहण लग गया। बच्चों की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। पिता की मौत से 12 वर्षीय बच्ची व 14 वर्षीय बालक की मनोदशा जानकर सभी द्रवित हो जाएंगे। वे अपनी पढ़ाई और लालन पालन को लेकर चिंतित हैं।

मां ने बताया कि कोरोना ने सब कुछ छीन लिया। सरकार ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है, लेकिन यह योजना कब तक चलती रहेगी, इसका कोई भरोसा नहीं। ऐसे में संशय हमेशा बना हुआ है।

केस दो

चकिया ब्लाक के एक गांव निवासी किसान की कोरोना संक्रमण से मौत के बाद उसके दो बच्चे खुद को असहाय व बेसहारा महसूस कर रहे हैं। बच्चों का कहना है कि पिता की मौत के बाद अब आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। 14 वर्षीय बेटे की मानें तो कोई मददगार नहीं है। मां कहती हैं कि सरकार की पहल से थोड़ी उम्मीद जगी है, हालांकि मदद जारी रहनी चाहिए।

सरकार देगी मुफ्त शिक्षा व लैपटाप

सरकार कोरोना का दंश झेल रहे बच्चों के अभिभावकों के खाते में हर माह चार हजार रुपये भेजेगी। इसके अलावा कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में मुफ्त शिक्षा के साथ ही लैपटाप अथवा टैबलेट दिया जाएगा। ऐसी बेटियों की शादी के लिए 1.1 लाख की आर्थिक मदद भी दी जाएगी। वर्जन बोले, अधिकारी

'जिले में 56 बच्चे ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जिनके माता-पिता में किसी एक ही कोरोना संक्रमण की मौत हुई है। 30 बच्चों के आवेदन स्वीकृत हो गए हैं। बाकी आवेदनों का सत्यापन किया जा रहा। सभी को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ मिलेगा।

इंद्रावती यादव, जिला प्रोबेशन अधिकारी