विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चंदौली में कोबरा के डसने से बिगड़ी हालत, 30 वायल एंटीवेनम और 49 घंटे वेंटिलेटर पर रखकर बचाई जान

By Uday Nath Shukla Edited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 27 Aug 2026 05:50 PM (IST)

चंदौली में कोबरा के डसने से गंभीर हुए सुजीत की जान 49 घंटे वेंटिलेटर और 30 वायल एंटीवेनम से बची। ...और पढ़ें

चंदौली में कोबरा के डसने से गंभीर हालत, 30 वायल एंटीवेनम और 49 घंटे वेंटिलेटर ने बचाई जान।

चंदौली में कोबरा के डसने से गंभीर हालत, 30 वायल एंटीवेनम और 49 घंटे वेंटिलेटर ने बचाई जान।

HighLights

  1. चंदौली में कोबरा के डसने से युवक की हालत गंभीर हुई।

  2. 49 घंटे वेंटिलेटर और 30 वायल एंटीवेनम से जान बची।

  3. अब युवक की हालत में सुधार, चिकित्सकों की निगरानी में।

जागरण संवाददाता, चंदौली। कोबरा के डसने से गंभीर हुए सदर विकास क्षेत्र के कांटा गांव निवासी सुजीत की हालत में उपचार के बाद सुधार हुआ। सर्पदंश के बाद स्वजन 25 अगस्त की दोपहर उसे गंभीर अवस्था में बाबा किनाराम स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के आपातकालीन विभाग में लेकर पहुंचे।

चिकित्सकों ने तत्काल स्थिति संभालते हुए इंट्यूबेशन किया और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। लगभग 49 घंटे की गहन चिकित्सा और 30 वायल एंटीवेनम खर्च करने के बाद हालत में सुधार हुआ तो गुरुवार को वेंटिलेटर हटा दिया गया। फिलहाल उसे नान रिब्रीदर मास्क (एनआरबीएम) पर रखकर चिकित्सकों की निगरानी में उपचार दिया जा रहा है।

सर्पदंश पीड़ित को 25 अगस्त की दोपहर 1:25 बजे अस्पताल लाया गया था। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए इमरजेंसी मेडिकल आफिसर डा. अजय वर्मा ने तत्काल इंट्यूबेशन किया। ड्यूटी फार्मासिस्ट बीर सिंह और जूनियर रेजिडेंट की टीम ने चिकित्सक का सहयोग किया। इसके बाद दोपहर 2:20 बजे रोगी को आइसीयू में स्थानांतरित किया गया।

आइसीयू प्रभारी डा. विवेकानंद तिवारी के निर्देशन में उपचार और आवश्यक मानकों की लगातार निगरानी की गई। नर्सिंग टीम की जिम्मेदारी शुभम सिंह पटेल ने संभाली। रोगी को 25 अगस्त की दोपहर 1:30 बजे से गुरुवार की दोपहर 2:30 बजे तक वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। इस दौरान चिकित्सकों ने उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी।

हालत में सुधार होने पर गुरुवार को दोपहर 2:35 बजे वेंटिलेटर हटा दिया गया और एनआरबीएम पर रखा गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार सर्पदंश के गंभीर मामलों में समय पर आपातकालीन उपचार और आवश्यक जीवनरक्षक सहायता मिलने से रोगी की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

सर्पदंश पर क्या करें

  • रोगी को शांत रखें और अनावश्यक चलने-फिरने से बचाएं।
  • डसे हुए अंग को स्थिर रखें और उसे कम से कम हिलाएं।
  • अंग से अंगूठी, चूड़ी, कड़ा जैसी कसाव वाली वस्तुएं हटा दें।
  • रोगी को बिना देर किए नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में पहुंचाएं।
  • संभव हो तो सुरक्षित दूरी से सांप की पहचान के लिए फोटो लें।

सर्पदंश पर क्या न करें

  • डसे स्थान पर चीरा लगाकर खून निकालने का प्रयास न करें।
  • घाव को मुंह से चूसने का प्रयास न करें।
  • डसे अंग पर बहुत कसकर रस्सी या कपड़ा न बांधें।
  • घाव पर मिट्टी, तेल, जड़ी-बूटी, बर्फ या कोई रसायन न लगाएं।
  • झाड़-फूंक के चक्कर में अस्पताल पहुंचने में देरी न करें।

सर्पदंश के बाद सुजीत को लेकर स्वजन अस्पताल पहुंचे थे। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई और गहन चिकित्सा के माध्यम से उसकी जान बचाई जा सकी। सर्पदंश के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण है। गंभीर रोगियों को आवश्यक उपचार और जीवनरक्षक सहायता उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल की चिकित्सकीय व नर्सिंग टीम तत्पर रहती है।


-

प्रो. डा. अमित सिंह, प्राचार्य।