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किसानों के लिए बड़ी राहत! बीज की थैलियों पर अनिवार्य होगा QR कोड, असली-नकली की होगी पहचान

Published: Sat, 21 Feb 2026 06:00 AM (GMT+05:30)

चंदौली कृषि विभाग बीज खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए नई क्यूआर कोड व्यवस्था शुरू कर रहा है। अब सरकारी ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, चंदौली। बीज खरीद में पारदर्शिता लाने और अवैध कारोबार पर प्रतिबंध लगाने के लिए कृषि विभाग नई व्यवस्था आरंभ करने जा रहा। इस पहल के तहत अब बाजार में मिलने वाली सरकारी और निजी कंपनियों की हर बीज थैली पर क्यूआर कोड अंकित रहेगा।

किसान मोबाइल से कोड स्कैन करते ही बीज की गुणवत्ता, जांच प्रक्रिया, उत्पादन एजेंसी, प्रमाणीकरण सहित पूरी जानकारी बीज लेते समय ही देख सकेंगे। विभाग का दावा है कि इससे किसानों को सही बीज चुनने में सहूलियत मिलेगी और अप्रमाणिक बीज की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

जनपद में लगभग 84 बीज की दुकानें हैं। एआई टूल्स के इस्तेमाल से खेती में लागत घटाने और मुनाफा बढ़ाने की योजना पर काम हो रहा। इसी के मद्देनजर बीज की पहचान को यह कदम उठाया गया है। कृषि निदेशालय के निर्देश पर जनपद स्तर से डाटा जुटाया जा रहा। इसमें बीज उत्पादक संस्थाओं, एफपीओ, कृषि विज्ञान केंद्र, बीज कंपनियों, लाइसेंस धारक थोक कारोबारियों, फुटकर विक्रेताओं से विवरण एकत्र किया जाना है।

यह डाटा राज्य कृषि निदेशालय को भेजा जाएगा और ‘साथी’ पोर्टल (सीड आथेंटिकेशन, ट्रेसबिलिटी एंड होलिस्टिक इन्वेंट्री) पर फीड होगा। पोर्टल पर दर्ज ब्यौरे के आधार पर क्यूआर कोड तैयार होगा। कोड स्कैन करते ही बीज की प्रजाति, उत्पादन एजेंसी, प्रमाणीकरण, गुणवत्ता परीक्षण से जुड़ी पूरी जानकारी स्क्रीन पर मिलेगी।

इससे किसान सर्वोत्तम गुणवत्ता का बीज चुन सकेंगे। मार्च 2026 तक ग्राम स्तर पर ब्लाकवार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलेंगे। मास्टर ट्रेनरों को तकनीक की जानकारी दी जा रही। एक अप्रैल से सरकारी और निजी क्षेत्र की बीज थैलियों पर क्यूआर कोड अनिवार्य रूप से अंकित रहेगा।

किसानों को इस सुविधा का लाभ मिले, इसके लिए विभाग अभियान चलाएगा। हाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने अधिकारियों को जनपद स्तर पर डाटा संग्रह की प्रक्रिया समझाई।

क्यूआर कोड व्यवस्था से बीज बिक्री में पारदर्शिता आएगी। किसान खरीद से पहले पूरी जानकारी देख सकेंगे। इससे अप्रमाणिक बीज के कारोबार पर प्रभावी रोक लगेगी और किसानों का भरोसा मजबूत होगा।

                                                                                            भीमसेन, उप निदेशक कृषि।