चंदौली के चर्चित NRHM घोटाले में तत्कालीन CMO सहित तीन को 5-5 साल की जेल, 18 साल बाद फैसला
चंदौली में बहुचर्चित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में विशेष सीबीआई अदालत ने फैसला सुनाया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
चंदौली एनआरएचएम घोटाले में सीबीआई अदालत का फैसला।
पूर्व सीएमओ सहित तीन को पांच साल की कठोर कारावास।
परिवार नियोजन उपकरण खरीद में फर्जीवाड़े का मामला था।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। बहुचर्चित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में विशेष सीबीआइ अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया। अदालत ने चंदौली जिले में महिलाओं के परिवार नियोजन से जुड़े उपकरणों की खरीद में हुए फर्जीवाड़े के मामले में तत्कालीन सीएमओ (परिवार कल्याण) डॉ. विभूति प्रसाद, उपभोक्ता सहकारी संघ के पूर्व क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल जायसवाल और दवा कारोबारी सुरेंद्र पांडेय को दोषी करार दिया।
कोर्ट ने सभी दोषियों को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास और एक-एक लाख रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई।
2008 का है मामला
वर्ष 2008 से 2010 के दौरान चंदौली जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिलाओं को गर्भधारण से रोकने के लिए 21,694 कापर-टी की खरीदारी की गई थी। सीबीआइ जांच में खुलासा हुआ कि यह पूरी खरीद नियमों को दरकिनार कर केवल निजी आर्थिक लाभ और कमीशनखोरी के उद्देश्य से की गई थी।
विभाग में इस भारी मात्रा में कापर-टी की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं थी। दवा कारोबारी और अधिकारियों ने आपस में साठगांठ करके कागजों और सप्लाई में हेरफेर की, जिससे सरकारी खजाने को 8.22 लाख रुपये की सीधी राजस्व क्षति पहुंची।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेशव्यापी एनआरएचएम घोटाले की जांच सीबीआइ को सौंपी गई थी। उस समय चंदौली में हुई इस अनियमितता का पर्दाफाश हुआ था। जांच एजेंसी ने गहन छानबीन के बाद वर्ष 2014 में प्राथमिकी दर्ज की।
इसके बाद 15 दिसंबर 2015 को सीबीआइ ने तीनों आरोपितों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। अदालत में चले लंबे विचारण के दौरान सीबीआइ ने मजबूत दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। जिसके आधार पर कोर्ट ने तीनों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आपराधिक साजिश का दोषी पाया।
