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इस बार भव्य होगा दुर्गापूजा पंडाल, चंदौली में 280 जगह सजाने में जुटे कारीगर; महंगी मिट्टी से बन रही प्रतिमाएं

Published: Sun, 04 Oct 2026 04:52 PM (IST)Updated: Sun, 04 Oct 2026 04:54 PM (IST)

चंदौली में शारदीय नवरात्र के लिए दुर्गापूजा की तैयारियां जोरों पर हैं, जिले में करीब 280 पंडालों में प्रतिमाएं स्थापित ...और पढ़ें

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. चंदौली में इस बार 280 दुर्गापूजा पंडाल स्थापित होंगे।

  2. पीडीडीयू नगर के मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं।

  3. मिट्टी व सामग्री महंगी होने से मूर्तियों की लागत बढ़ी है।

जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली)। शारदीय नवरात्र को लेकर नगर में दुर्गापूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। विभिन्न पूजा समितियों की ओर से पंडालों का निर्माण शुरू करा दिया गया है। कहीं बांस-बल्लियों से पंडाल का ढांचा खड़ा किया जा रहा है तो कहीं सजावट के लिए कारीगर जुटे हैं।

दूसरी ओर पीडीडीयू नगर की नई बस्ती व सेंट्रल कॉलोनी में मूर्तिकार मां दुर्गा समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हैं। जिले में इस बार करीब 280 पंडालों में प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।

नई बस्ती में छह परिवारों के करीब 30 कारीगर मूर्ति निर्माण में लगे हैं। इनमें करीब 20 कारीगर चार परिवारों से हैं। पिछले वर्ष यहां से करीब 200 प्रतिमा सेट की आपूर्ति हुई थी। इस बार अब तक 50 सेट के आर्डर मिल चुके हैं। कारीगरों का लक्ष्य करीब 150 सेट तैयार करने का है।

पूजा समितियों की मांग के अनुसार प्रतिमाओं का आकार, स्वरूप व सजावट तय की जा रही है। एक प्रतिमा सेट में शेर पर सवार मां दुर्गा के साथ मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय व महिषासुर की प्रतिमा शामिल होती है।

नई बस्ती में तैयार प्रतिमाओं की मांग चंदौली जिले के बबुरी, सैयदराजा, चंदौली व चकिया के अलावा मिर्जापुर के अहरौरा, चुनार व जमालपुर तक है। बिहार के दुर्गावती व भभुआ से भी खरीदार प्रतिमाएं लेने पहुंचते हैं। सेंट्रल कॉलोनी में भी कारीगर प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

महंगी मिट्टी से बढ़ी लागत

मूर्ति निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी, लकड़ी, रंग व अन्य सामग्री के दाम बढ़ने से कारीगरों की लागत बढ़ गई है। कारीगरों के अनुसार पिछले वर्ष एक ट्रैक्टर मिट्टी ढाई से तीन हजार रुपये में मिल जाती थी।

इस बार इसकी कीमत बढ़कर साढ़े तीन से चार हजार रुपये तक पहुंच गई है। एक ट्रैक्टर मिट्टी से करीब दो सेट प्रतिमाएं तैयार होती हैं। इस बार प्रतिमाओं की कीमत पांच हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक है। आकार, डिजाइन व सजावट के अनुसार कीमत में अंतर है।

बारिश ने बढ़ाई थोड़ी परेशानी

लगातार हुई बारिश के कारण प्रतिमाओं को सुखाने में भी कारीगरों को परेशानी हो गई है। हालांकि इस दिनों मैसम थोड़ा ठीक हो गया है। सीमित जगह में बड़ी संख्या में प्रतिमाएं तैयार करने से काम और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

इसके बावजूद समय से आर्डर पूरा करने के लिए कारीगर लगातार काम कर रहे हैं। पंडाल समितियां भी प्रतिमाओं के साथ सजावट, प्रकाश व अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। नवरात्र नजदीक आने के साथ नगर में दुर्गापूजा को लेकर चहल-पहल बढ़ने लगी है।

बोले मूर्तिकार

मिट्टी व निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने से मूर्तियों की लागत बढ़ी है। बारिश के कारण प्रतिमाओं को सुखाने में परेशानी हो रही है। इसके बावजूद समय से आर्डर पूरा करने में जुटे हैं।

अब तक 50 सेट के आर्डर मिले हैं। करीब 150 सेट तैयार करने का लक्ष्य है। पंडालों की मांग के अनुसार प्रतिमाओं का आकार व डिजाइन तैयार किया जा रहा है।

कलाकारों को सस्ती मिट्टी का इंतजार

नई बस्ती में लंबे समय से मूर्ति निर्माण करने वाले कारीगरों का कहना है कि लागत लगातार बढ़ रही है। मिट्टी के साथ लकड़ी, रंग व अन्य सामान महंगा होने से प्रतिमाओं की कीमत बढ़ाना मजबूरी बन गई है। कारीगरों ने सस्ती मिट्टी उपलब्ध कराने के साथ सरकारी स्तर से सहयोग की मांग की है।