जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली): वाराणसी, लोहता में ओड़िशा के नाबालिगों से बंधुआ मजदूरी करवाने का मामला प्रकाश में आया है। इसकी पोल तब खुली जब काम करवा रहे लोगों को चकमा देकर 11 नाबालिग व 10 किशोर फैक्ट्री से फरार होकर जंक्शन पर पहुंच गए। फुटओवर ब्रिज पर डरे सहमे बच्चों को बैठे देख आरपीएफ इंस्पेक्टर ने पूछताछ शुरू की। इसके बाद पूरा मामला समझ में आया। पीडीडीयू आरपीएफ पोस्ट प्रभारी संजीव कुमार ने बचपन बचाओ संस्था और वाराणसी पुलिस के साथ मिलकर लोहता में छापेमारी कर चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। बच्चों का आरोप था कि पिछले एक साल से काम करवा रहे हैं, लेकिन महीनों से पारिश्रमिक नहीं मिला। इसी वजह से वे सभी घर जाने की फिराक में थे।

फुटओवर ब्रिज पर डरे सहमे बैठे थे 11 नाबालिग व 10 किशोर

आरपीएफ ने जंक्शन पर आपरेशन आहट अभियान के तहत चेकिंग कर रहे थे। जंक्शन पर 21 नाबालिग व बालिग बच्चे एक साथ डरे सहमे घूमते हुए जवानों को दिखे। संदेह होने पर जवानों ने उनसे पूछताछ शुरू की। बच्चों ने जब अपनी आपबीती सुनाई तो जवान सन्न रह गए। उन्होंने तत्काल पूरे मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी। इसके बाद आरपीएफ पोस्ट प्रभारी जवानों के साथ लोहता पहुंचे।

छापेमारी में चार गिरफ्तार

यहां संचालित एक फैक्ट्री छापेमारी की और चार लोगों को हिरासत में ले लिया। बचपन बचाओ आंदोलन के को-आर्डिनेटर देशराज सिंह ने लोहता थाने में चारों के खिलाफ मुकदमा लिखवाया। इसके बाद लोहता पुलिस चोरों को गिरफ्तार कर अगली कार्रवाई में जुट गई। टीम में आरपीएफ निरीक्षक संजीव कुमार सहित अवर निरीक्षक मुकेश कुमार, सहायक उप निरीक्षक प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, आरक्षी अरुण कुमार सिंह, अमित जैसवाल, सदानंद यादव और बचपन बचाओ आंदोलन के को- आर्डिनेटर देशराज सिंह व कृष्ण शर्मा शामिल रहे।

सीमेंट का बनवाते थे रेल स्लीपर

लोहता स्थित खेमचंद्र स्लीपर कंक्रीट फैक्ट्री पर छापेमारी की गई तो पता चला कि यहां सीमेंट कंक्रीट का रेलवे का स्लीपर बनाया जाता है। यह फैक्ट्री एक प्राइवेट एजेंसी द्वारा संचालित है। सुपरवाइजर अन्य प्रदेशों से बच्चों को लालच देकर काम कराने के लिए लाते हैं। इसके बाद उनसे जी तोड़ मेहनत को करवाते हैं, लेकिन समय से पारिश्रमिक नहीं देते थे।

अभी चलेगी जांच, कड़ी होगी कार्रवाई

बंधुआ मजदूरी कराने का यह पहला मामला प्रकाश में नहीं आया है। अभी कुछ माह पहले की चंधासी में भी आरपीएफ ने छापेमारी कर कई बंधुआ मजदूरी का बरामद किया था। फैक्ट्री संचालक ओड़िशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित अन्य प्रदेशों के बच्चों को काम के लिए लाते हैं। जब बच्चे बरामद होते हैं तो उनकी भाषा के कारण अधिक जानकारी नहीं मिल पाती है, लेकिन अब आरपीएफ का मानना है कि इस मामले में जांच लंबी चलेगी और कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।

Edited By: Nirmal Pareek

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