जागरण संवाददाता, चंदौली : कोरोना से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हैं। सराफा बाजार पर इसका व्यापक असर पड़ा है। अक्षय तृतीया पर भी बाजार में रौनक नहीं आई। धंधा ठप होने की वजह से कारीगर घर लौट चुके हैं। वहीं लगातार घाटा सहते-सहते व्यापारी भी हिल चुके हैं। हालांकि बाजार खुलने पर उन्हें दोबारा धंधा परवान चढ़ने की उम्मीद है।

समृद्धि व सिद्धी के पर्व अक्षय तृतीया पर चांदी के सिक्के व अन्य रत्नों की पूजा का विधान है। ऐसे में सोना, चांदी की खरीद बढ़ जाती है। एक सप्ताह पहले से ही लोग खरीदारी करने लगते हैं। हालांकि इस बार ऐसी स्थिति नहीं है। कोरोना ने जनजीवन पर प्रतिकूल असर डालने के साथ ही आय को भी प्रभावित किया। इससे लोगों की खरीदने की क्षमता कम हुई है। इसका असर बाजार पर दिख रहा है। सराफा व्यापारियों को अक्षय तृतीया पर बाजार में रौनक लौटने की उम्मीद थी, लेकिन कोरोना ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बेकार बैठे कारीगर भी अप्रैल में ही घरों का रुख कर गए। बाजार की हालत को देखते हुए व्यापारियों ने भी उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की।

बाजार की कहानी दुकानदारों की जुबानी

इस बार पिछले साल से भी खराब स्थिति है। मुश्किल से एक घंटे के लिए दुकान खुल रही है। पूरा समय ग्राहकों के इंतजार में ही बीत जा रहा है। कई दिनों के बाद इक्का-दुक्का ग्राहक ही आ रहे हैं।

बबलू सोनी

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इस बार लग्न व अक्षय तृतीया की वजह से भी बाजार में तेजी नहीं आई। पहले अक्षय तृतीया को लेकर खरीदारों की भीड़ बढ़ जाती थी लेकिन इस बार धंधा मंदा है।

शत्रुघ्न सेठ

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दो वर्षों से ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। कोरोना की वजह से सराफा व्यापार को काफी क्षति पहुंची है। लोगों के पास दैनिक उपयोग की वस्तुएं खरीदने को पैसे नहीं तो सोना कौन खरीदेगा।

संतोष सेठ

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अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने के लिए लोग पहले की आर्डर देते हैं। हालांकि इस बार ऐसी स्थिति नहीं है। इक्का-दुक्का ग्राहकों को छोड़ दें तो अन्य किसी ने सोना खरीदने के लिए संपर्क नहीं किया।

लवकुश

--------------------------पुराने सिक्के अथवा आभूषण को गंगाजल से शुद्ध कर करें पूजन

ज्योतिषाचार्य डाक्टर रामचंद्र शुक्ल बताते हैं कि अक्षय तृतीया भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा होती है। इस दौरान सोना व अन्य वस्तुओं के पूजन का भी विधान है। मान्यता है कि पूजित वस्तु अक्षय रहती है। वहीं समृद्धि भी बढ़ती है। बाजार बंद होने की वजह से लोगों को नए गहने खरीदने में दिक्कत हो सकती है। इसलिए पुराने सिक्कों व आभूषणों को गंगाजल से शुद्ध कर इसका ही पूजन करें।