गौरव शर्मा, बुलंदशहर

यह खबर सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक और छात्र-छात्राओं समेत उनके अभिभावकों को सचेत करने वाली है। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को भी त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है। जलनिगम स्तर से 300 से अधिक सरकारी प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों के हैंडपंपों के पानी की जांच कराई गई। जांच में किसी स्कूल में फ्लोराइड अधिक मिला तो कहीं नाइट्रेट अधिक। टर्बिडिटी यानि गंदैला पानी तो अधिकांश स्कूलों में मिला। ऐसा पानी बाल स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि सरकारी मशीनरी को बाल स्वास्थ्य की तरफ ध्यान देते हुए यथासंभव कदम उठाए जाए। जलनिगम अफसर-कर्मियों ने पिछले दो महीने में अगौता में 38, सिकंदराबाद में 71, गुलावठी में 16, ऊंचागांव में 28, लखावटी में 17, अरनिया में 16 आदि की जांच की।

--------

1200 से अधिक स्कूलों में होनी है जांच

जलनिगम के अफसरों ने बताया कि अभी तक 300 सरकारी स्कूलों की जांच पूरी हो चुकी है। करीब 1200 सरकारी स्कूलों की जांच जिलेभर में की जानी है। सैंपल लिए जा रहे हैं। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर वरिष्ठ अफसरों को भेज दी जाएगी।

---------

इन तत्वों की होनी चाहिए उपस्थिति

नाइट्रेट 45 मिलीग्राम प्रतिलीटर, फ्लोराइड डेढ़ मिलीग्राम प्रतिलीटर, टर्बिडिटी पांच एनटीयू, सल्फर 400 मिलीग्राम प्रतिलीटर, आयरन एक मिलीग्राम प्रतिलीटर, कठोरता 60 मिलीग्राम प्रतिलीटर, एल्केनिटी 600 मिलीग्राम प्रतिलीटर होना चाहिए।

---------

कहां क्या रही अधिकता?

दानपुर के रहमापुर प्राथमिक विद्यालय में नाइट्रेट 52.72 मिग्रा प्रतिलीटर मिला। पहासू के टुंडाखेड़ा प्राथमिक विद्यालय टर्बिडिटी 12.55 एनटीवी, पहासू के ही आंगनबाड़ी केंद्र में टर्बिडिटी 15.76 एनटीवी, पहासू के पंड्रावल प्राथमिक विद्यालय में फ्लोराइड 250 मिलीग्राम प्रतिलीटर, करैना प्राथमिक विद्यालय में फ्लोराइड 300 मिलीग्राम प्रतिलीटर, ऊंचागांव के भदौरा प्राथमिक विद्यालय में टर्बिडिटी 12.4 मिलीग्राम प्रतिलीटर, लखावटी के सेखपुरगडवा पूर्व माध्यमिक विद्यालय में टर्बिडिटी 10.23 मिलीग्राम प्रतिलीटर, रौसरा प्राथमिक विद्यालय में टर्बिडिटी 9.58 मिलीग्राम प्रतिलीटर, मंगलपुर प्राथमिक विद्यालय में टर्बिडिटी 16.7 मिलीग्राम प्रतिलीटर, भौपुर प्राथमिक विद्यालय में टर्बिडिटी 69.6 मिलीग्राम प्रतिलीटर, चठेरा प्राथमिक विद्यालय में टर्बिडिटी 31.9 मिलीग्राम प्रतिलीटर, कनौना प्राथमिक विद्यालय में नाइट्रेट 48.53 मिलीग्राम प्रतिलीटर, नगला नित्यानंदपुर प्राथमिक विद्यालय में टर्बिडिटी 17.5 मिलीग्राम प्रतिलीटर, औगना प्राथमिक विद्यालय में टर्बिडिटी 11.1 मिलीग्राम प्रतिलीटर, सिकंदराबाद के सुखलालपुर प्राथमिक विद्यालय में आयरन 1.48 मिलीग्राम प्रतिलीटर आदि के अलावा अन्य स्कूलों में भी विभिन्न तत्वों की अधिकता मिली है।

--------

क्या हैं नुकसान?

चिकित्सक डॉ. एसके गर्ग ने बताया कि जल में नाइट्रेट की तय मात्रा से अधिक होने पर नवजात शिशु के शरीर का रंग नीला पड़ जाता हैं। इसे ब्लूबेबी रोग कहा जाता है। फ्लोराइड की अधिकता से फ्लोरोसिस बीमारी होने का खतरा रहता है। टर्बिडिटी गंदा पानी होने का सूचक है, इससे पीलिया होने की संभावना रहती है। आयरन से किडनी-लीवर प्रभावित प्रभावित, सल्फर, एल्केनिटी और कठोरता भी शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि अधिक मात्रा होने पर कई बार जान पर भी बन आती है।

------

इन्होंने कहा

सरकारी स्कूलों के हैंडपंपों की जांच के लिए शासन से निर्देश आए थे। 300 से अधिक हैंडपंपों के पेयजल की जांच हो चुकी है। रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जहां पानी की गुणवत्ता सही नहीं है। वहां सुधार किए जाएंगे।

एसके शर्मा, एक्सईएन, जलनिगम

By Jagran