बुलंदशहर, जेएनएन। जिले में जुलाई 2018 में वाट्सएप पर वायरल हुई चैट में एडीजी प्रशांत कुमार समेत आला अधिकारियों पर रुपये लेने का आरोप लगाने वाले तत्कालीन डिबाई इंस्पेक्टर परशुराम यादव की वाट्सएप चैट सही पाई गई है। गाजियाबाद लैब से आई रिपोर्ट में साफ है कि इंस्पेक्टर का मोबाइल हैक नहीं हुआ था। उनके मोबाइल में चल रहे सीयूजी नंबर से ही चैट की गई थी। जबकि इंस्पेक्टर ने अपनी सफाई में कहा था कि उनका मोबाइल हैक करके यह चैट की गई है। अब इस मुकदमे में एसएसपी ने चार्जशीट लगाने के आदेश दिए है।

आरोपों से लखनऊ तक मचा था हड़कंप

दरअसल, डिबाई इंस्पेक्टर रहे परशुराम यादव की चैट के सोशल मीडिया पर वायरल हुए स्क्रीन शॉट की बातचीत में था कि उन्होंने अपना तबादला एडीजी प्रशांत कुमार को 50 हजार रुपये देकर कराया है। वहीं, बुलंदशहर आने पर उन्होंने तत्कालीन एसएसपी केबी सिंह को तीन लाख रुपये देकर डिबाई थाने का चार्ज लिया है। इस चैट में तत्कालीन आइजी रामकुमार पर भी रुपये लेने का आरोप लगाया गया था। इस प्रकरण में लखनऊ से तक हड़कंप मचा था।

अब साफ हुआ कि मोबाइल हैक नहीं हुआ था

तत्कालीन एसएसपी केबी सिंह ने परशुराम को सस्पेंड करते हुए नगर कोतवाली में आइटी एक्ट के तहत अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इंस्पेक्टर के मोबाइल से चैट हुई है या नहीं, इसकी जांच के लिए इंस्पेक्टर के मोबाइल को जब्त कर सिम के साथ गाजियाबाद एफएसएल (फोरेंसिक साइंटिस्ट लैबोरेट्री) में जांच के लिए भेजा गया था। अब आई रिपोर्ट में साफ हो गया है कि इंस्पेक्टर का मोबाइल हैक नहीं हुआ था। उनके मोबाइल में चल रहे सीयूजी नंबर से ही चैट हुई है।

इनका कहना है

गाजियाबाद लैब की रिपोर्ट आ गई है। जिसमें साबित हो गया है कि इंस्पेक्टर के मोबाइल से ही चैट की गई है। मोबाइल हैक नहीं हुआ था।

- शिवराम यादव, एसपी क्राइम

मुझे अभी पता नहीं है कि गाजियाबाद लैब से रिपोर्ट आ गई है। यदि इंस्पेक्टर के मोबाइल से चैट होना पाया गया है तो शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

- प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन

हमारे पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यदि कोई नोटिस या फिर कुछ अन्य कागजात आता है तो हम जवाब देंगे।

- परशुराम यादव, इंस्पेक्टर 

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