रसोई पर महंगाई का हमला: त्योहारी सीजन से ठीक पहले महंगी चीनी के कारण बढ़ने लगे मिठाई के दाम, फीकी हो रही चाय की चुस्की
Bulandshahr News: चीनी की कीमतों में उछाल आया है, जिससे आम आदमी का बजट बिगड़ गया है और त्योहारों पर ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
अचानक हुई बढ़ोतरी का सीधा असर अब आम उपभोक्ताओं पर।
खुदरा बाजार में चीनी के दाम 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचे।
जागरण संवाददाता, बुलंदशहर। त्योहारी सीजन से पहले ही चीनी पर आई तेजी ने आम आदमी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। पिछले 25 दिन के भीतर चीनी पर 20 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोत्तरी हुई है।
खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतें बढ़कर 65 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। इससे आम आदमी का घरेलू बजट बिगड़ गया। उधर, चीनी की तेजी से थोक मंडी से लेकर फुटकर बाजार तक चिंता बढ़ गई है और चाय की चुस्की फीकी हो रही है।
किराना व्यापारी मोहित अरोरा का कहना है कि एक माह के आंकड़ों पर नजर डालें तो चीनी के दामों में लगातार उछाल देखने को मिला है। एक माह पूर्व थोक बाजार में जो चीनी 4,400 रुपये प्रति कुंतल बिक रही थी, उसके दाम पहले बढ़कर 4,700 रुपये प्रति कुंतल हुए और अब यह छलांग लगाकर सीधे 5,000 रुपये प्रति कुंतल के स्तर पर पहुंच गए हैं।
वर्तमान में चीनी का थोक भाव 6200 से 6300 रुपये प्रति कुंतल पर पहुंच गया है। अचानक हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर अब आम उपभोक्ताओं पर पड़ने लगा है। थोक भाव 6200 रुपये कुंतल पहुंचने के बाद अब फुटकर बाजार में चीनी के दाम 64 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। थोक कारोबारियों ने बताया कि इस बार गन्ने की फसल में आई कमी और मिलों में उत्पादन प्रभावित होने की वजह से बाजार में आपूर्ति घटी है, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि पीछे चीनी मिलों से ही माल की आवक काफी कम हो रही है। इस बार देश में गन्ने का रकबा और पैदावार कम रहने के चलते मिलों ने कोटा कम जारी किया है और बेस प्राइस बढ़ा दिए हैं। मात्र तीन दिनों में ही थोक भाव में 300 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी हो चुकी है।
अब जब थोक में ही चीनी 6300 रुपये कुंतल पड़ेगी तो उसमें ट्रांसपोर्टेशन, पल्लेदारी और आढ़त का खर्च जोड़कर फुटकर व्यापारी इसे 64 से 65 रुपये किलो में बेचने को मजबूर होंगे। यदि आने वाले दिनों में मिलों से आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो दामों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
पेड़ा, बर्फी और घेवर पर भी महंगाई की मार
अहार: चीनी महंगी होने का असर केवल त्योहारों की मिठाइयों तक सीमित नहीं रहेगा। रोजाना सुबह-शाम पी जाने वाली चाय और काफी, शरबत तथा घर में बनने वाले पकवानों की लागत भी बढ़ेगी। खीर, हलवा और सेवईं जैसे व्यंजनों में चीनी की खपत अधिक होने से त्योहार पर परिवारों का बजट और बढ़ने की आशंका है। त्योहारी सीजन में पेड़ा, बर्फी और घेवर की मांग बढ़ जाती है।
मिठाई कारोबारियों के अनुसार दूध, खोया, घी और ड्राई फ्रूट्स पहले से महंगे हैं। अब चीनी के भाव में तेजी ने लागत महंगी हो गई है। मिठाई विक्रेताओं का कहना है कि ज्यादातर मिठाईयों में खोया, सखे मेवा और चीनी का इस्तेमाल होता है। चीनी महंगी होने के बाद बर्फी, पेड़ा, लड्डू, रबडी, मलाई रोल समेत सभी मिठाईयों के भाव में 10 से 30 रुपये किलोग्राम तक की बढ़ोत्तरी की गई है।
