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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 02, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पंद्रह लाख विजि¨टग कार्ड और छह हजार साबुन के संग्रहालय

By JagranEdited By:
Published: Fri, 02 Feb 2018 03:00 AM (IST)

बुलंदशहर: बुलंदी पर पहुंचने के पीछे किसी व्यक्ति का श्रम और संघर्ष छिपा होता है। ऐसे ही

पंद्रह लाख विजि¨टग कार्ड और छह हजार साबुन के संग्रहालय
पंद्रह लाख विजि¨टग कार्ड और छह हजार साबुन के संग्रहालय

बुलंदशहर: बुलंदी पर पहुंचने के पीछे किसी व्यक्ति का श्रम और संघर्ष छिपा होता है। ऐसे ही व्यक्तियों में नगर निवासी ब्रजेश गर्ग का नाम शामिल है। एक ही साल 2012 में लिम्का बुक आफ रिकार्ड और इंडिया बुक आफ रिकार्ड में उनका नाम दो उपलब्धियों एक लाख पन्द्रह हजार विजि¨टग कार्ड और पांच हजार साबुन का संग्रह करने पर बना। बाद के वर्षों में इसे रिकार्ड होल्डर्स रिपब्लिक, व‌र्ल्ड रिकार्ड इंडिया और यूनिक व‌र्ल्ड रिकार्ड में भी दर्ज किया गया। संग्रह और बढ़ने पर अब उनका लक्ष्य गिनीज बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकार्ड है। उन्होंने घर के ड्राईंग रूम को 'सोप म्यूजियम' और दफ्तर को 'विजि¨टग कार्ड म्यूजियम' का रूप दे दिया है। संग्रह को बढ़ाने के लिए उन्होंने कई देशों की यात्राएं कीं। साथ ही देश-विदेश जाने वाले मित्र भी उन्हें साबुन व विजि¨टग लाकर देते हैं।

बचपन से ही कुछ अलग हटकर सोचने और करने की प्रवृत्ति रखने वाले ब्रजेश गर्ग का प्रकाशन का व्यवसाय है। जीवन में नया क्या हो ? इस प्रश्न ने वर्ष 1996 में उनमें साबुन एकत्र करने की रुचि पैदा की। सिलसिला चल निकला और वर्ष 2012 तक यह संग्रह पांच हजार तक पहुंच गया। इसमें भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, तुर्की, पाकिस्तान और मलेशिया सहित 70 देशों के साबुन शामिल हो गए। इसी साल लिम्का बुक और रिकार्ड और इंडिया बुक आफ रिकार्ड में उन्हें जगह मिली। संग्रह का सिलसिला अभी रूका नहीं है। नगर कोतवाली के पास स्थित उनके घर का ड्राईंग रूप साबुन के संग्रहालय में तब्दील हो गया है और इसमें आज छह हजार से अधिक साबुन हैं।

बात यहीं खत्म नहीं हुई उन्होंने वर्ष 2011 में विजि¨टग कार्ड का संग्रह शुरू किया। एक ही साल में यह संख्या एक लाख 15 तक पहुंच गई। वर्ष 2012 में लिम्का बुक और इंडिया बुक आफ रिकार्ड ने इसे शामिल किया। विजि¨टग कार्डों को उन्होंने अपने दफ्तर में बड़े ही सुव्यवस्थित ढंग से एलबमों में रखा है। इन्हें देश, प्रदेश, जिले, पेशे, सरनेम आदि अलग-अलग वर्ग में बांटा है। गर्ग बताते हैं कि यह संख्या अब 15 लाख तक पहुंच चुकी है। विजि¨टग कार्ड और साबुन दोनों के अपने संग्रह को उन्होंने गिनीज बुक आफ व‌र्ल्ड रिकार्ड में शामिल कराने के लिए कवायद शुरू कर दी है।

पांच हजार टूथपेस्ट का संग्रह

बुलंदशहर: ब्रजेश गर्ग बताते हैं कि उनके पास पांच हजार टुथपेस्टों का भी संग्रह है, लेकिन इसके रिकार्ड के लिए अभी उन्होंने दावा नहीं किया है। जन्मतिथि के आधार पर नोट संग्रह करने का भी उन्हें शौक है। जैसे उनकी जन्मतिथि 29 जनवरी 1958 को 29-01-58 के अंदाज में पढ़ा जाए तो 290158 नंबर का नोट उन्होंने संग्रहित किया। कई सेलीब्रेटी को उन्होंने उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं ऐसे नोट उपहार स्वरूप देकर दीं। उनके पास तीन वाहन हैं। सभी का नंबर जन्मतिथि के हिसाब 2901 है। इतना ही नहीं मोबाइल नंबर के अंत में भी 29158 आता है। अपने व्यवसाय और रिकार्ड बनाने में समय देने के साथ- साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों से भी जुड़कर जन उपयोगी कार्यों में सहभागिता भी करते हैं।