बुलंदशहर, जेएनएन। मंगलवार की सुबह साढ़े आठ बजे मेले जैसी भीड़, पर्चा बनवाने और दवा लेने के लिए काउंटर पर लोगों के बीच आपाधापी, कुछ कमरों में डाक्टरों और स्टाफ की कुर्सियां खाली। जो डाक्टर बैठे उनके कमरे में इतनी भीड़ की सांस लेना मुश्किल। ऐसा ही कुछ नजारा जिला अस्पताल में देखने को मिला। डाक्टरों की कमी और वायरल के प्रकोप के चलते आलम ये है कि डाक्टर चेकअप करना दो दूर मरीज का चेहरा तक नहीं देख पा रहे हैं।

सोमवार को डीएम के आदेश पर एडीएम प्रशासन ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान 17 चिकित्सक और 34 कर्मचारी अनुपस्थिति मिले थे। निरीक्षण के दौरान चिकित्सकों ने अपना पक्ष रखते हुए हंगामा भी किया। उधर, मंगलवार को बड़ी संख्या में मरीज सुबह-सवेरे ही अस्पताल पहुंचे, लेकिन अधिकांश डॉक्टर अपने कक्ष में नहीं आए। वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या अधिक थी। काफी देर बाद डॉक्टर अपने कक्ष में पहुंचे और मरीजों का उपचार शुरू हो सका। इस संबंध में सीएमओ डा. केएन तिवारी का कहना है कि चिकित्सकों की कमी और स्टाफ कम होने के कारण मरीज अधिक देखने पड़ते हैं। कई बार शासन को पत्र भेज चुके हैं।

डीएम के व्यवहार से चिकित्सकों के सम्मान को पहुंची ठेस

जासं, बुलंदशहर : जिला अस्पताल में निरीक्षण को लेकर प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के सदस्यों ने बैठक कर रोष व्यक्त किया है। साथ ही प्रांतीय पदाकारियों को मामले से अवगत करते हुए पत्र भेजा है। संघ के अध्यक्ष डा. रोहताश कुमार यादव ने बताया कि सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ सेवा समिति की बैठक बुलाई गई थी। छह सितंबर और सात सितंबर को एसीएमओ डा. नरेश गोयल और जिला कुष्ठ अधिकारी और जिला मलेरिया अधिकारी को डीएम ने अपने कैंप कार्यालय पर बुलाया। आरोप है कि डीएम ने शाम को सात बजे से दस बजे तक अकारण ही बैठाए रखा। बिना वार्ता के डीएम ने उनको वापस भेज दिया। जब बिना वार्ता के वापस भेजने का कारण जानने के लिए डीएम से संपर्क किया गया तो डीएम ने सीडीओ से कहा कि पुलिस बुलवाकर इनको जेल में डलवा दो। अध्यक्ष का कहना है कि डीएम के व्यवहार से चिकित्सकों के सम्मान को ठेस पहुंची है। संघ के सदस्यों ने प्रांतीय कार्यकारिणी को इसके लिए पत्र भेजा है।

Posted By: Jagran

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