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क्यों कमजोर और टेढ़ी-मेढ़ी हो रहीं हैं बच्चों की हड्डियां, कैसे करें बचाव ?

By Jagmohan Sharma Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 05 Mar 2026 12:34 AM (GMT+05:30)

Calcium deficiency in kids : बच्चों में हड्डियों की समस्या बढ़ रही है। कैल्शियम की कमी से हड्डियां टेढ़ी-मेढ़ी हो रही हैं, जिससे फ्रैक्चर और ठिगनापन बढ़ रहा है।

प्रतीकात्‍मक फोटो

प्रतीकात्‍मक फोटो

HighLights

  1. बुलंदशहर में 20 प्रति‍शत बच्चों में कैल्शियम की कमी मि‍ली।

  2. युवाओं की हड्डियां भी कमजोर और खोखली हो रहीं

जागरण संवाददाता, बुलंदशहर। घर में मोबाइल और लैपटाप के साथ व्यवस्तता, खेल से दूरी और फास्टफूड के अधिक सेवन का असर बच्चों की हड्डियों पर पड़ रहा है। 20 प्रतिशत बच्चों में कैल्शियम की कमी से हड्डियां टेढ़ी-मेढ़ी होने की समस्या बढ़ रही है।

इससे बच्चों में ठिगनापन के साथ बार-बार फ्रैक्चर भी हो रहे हैं। ऐसी समस्या वाले मरीज कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कालेज के हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में पहुंच रहे हैं।

मोबाइल और खानपान का असर

मेडिकल कालेज के हड्डी रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. गौरवदेव शर्मा ने बताया कि मोबाइल, लैपटाप और टीवी पर बच्चे अधिक समय दे रहे हैं। घरों में कैद होने के कारण बच्चों का खेलकूद सीमित हो गया है। 

साथ ही खानपान में बच्चे फल, हरी सब्जी, दाल, दूध और इससे निर्मित सामग्री को पसंद नहीं कर रहे हैं।

इतना ही नहीं पेट भरने के लिए फास्टफूड, चाकलेट और शीतलपेय का सेवन कर रहे हैं। पांच से 12 साल के बच्चों में कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर मिल रही हैं। धूप की कमी से विटामिन-डी की कमी भी शरीर में मिल रही है।

20 प्रतिशत बच्चों में ये दिक्कत मिल रही है। इनमें से तीन प्रतिशत बच्चों की हड्डियां टेढ़ी-मेढ़ी मिल रही हैं। इससे बच्चों की लंबाई भी प्रभावित हो रही है।

युवाओं में भी हड्डियों की कमजोरी

हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. अनुभव शर्मा ने बताया कि पैदल कम चलने, पौष्टिक भोजन और धूप की कमी से 18 से 20 प्रतिशत युवाओं की हड्डियां कमजोर और खोखली मिल रही हैं। इससे गिरने या चोट लगने से फ्रैक्चर हो रहा है। यहां तक कि कूल्हे के फ्रैक्चर हो रहे हैं। 15 प्रतिशत में ये दिक्कत मिल रही है, जिसमें सात प्रतिशत युवा मरीज हैं।

55 साल से कम उम्र के मरीजों के उपचार से ये परेशानी ठीक हो रही है। 60 की उम्र के बाद कूल्हा प्रत्यारोपण करना पड़ता है। लेटकर मोबाइल-टीवी देखने से गर्दन और रीढ़ की हड्डी में भी विकार हो रहे हैं। इस समस्या से बचाव के लिए खानपान और जीवनशैली बदलनी पड़ेगी।

बच्चों में ये हो रही परेशानी

  • चोट लगने पर बार-बार फ्रैक्चर होना।
  • पैरों-मांसपेशियों में दर्द, सूजन।
  • बच्चों की गर्दन कमर और रीढ़ की हड्डी में दर्द।
  • पैरों की हड्डियों में तिरछेपन से चाल बिगड़ी।
  • देर तक खड़े न हो पाना।

इस तरह से करें बचाव

  • धूप में खेलते समय बच्चों का अधिकांश शरीर खुला होना चाहिए।
  • दूध, लस्सी समेत दूध से निर्मित शुद्ध सामग्री बच्चों को जरूर दें।
  • दाल, हरी सब्जी, सलाद, मौसमी फल का भोजन में अधिक उपयोग करें।
  • बच्चों को दो से तीन घंटे रोज भागदौड़ वाले खेल खिलाएं।
  • 11 से दोपहर तीन बजे तक बच्चों को जरूर बाहर निकालें।
  • लेटकर, पीठ टेककर फोन देखने या पढ़ाई न करने दें।