बुलंदशहर, जेएनएन : शहर में लगने वाले जाम से हर कोई परेशान है। शादी ब्याह हो तो जाम, रैली निकल रही हो तो जाम, अवैध पार्किंग से जाम। रही सही कसर अतिक्रमण पूरी कर देता है। जाम से निजात दिलाने के तमाम दावे किए जाते हैं लेकिन धरातल पर कुछ नहीं होता। हालांकि शहर के जाम की समस्या से निजात पाने के लिए सूबे के पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रोफेसर किरनपाल सिंह ने रिग रोड का खाका तैयार कराया था। तत्कालीन डीएम रोशन जैकब के माध्यम से यह प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। सरकार के बदलते ही रिग रोड का सपना फाइलों में दबकर रह गया। अब चुनावी रण में वह भी ताल ठोक रहे हैं। इस योजना को कितना धरातल पर उतारने में सफल हो पाते है, यह तो चुनावी नतीजे आने के बाद भविष्य के गर्त में छिपा है, लेकिन शहरवासियों से लेकर राहगीरों के लिए जाम नासूर बना हुआ है।

कालाआम चौराहे पर ट्रेफिक सिग्नल तक बदहाल

जिले की शहादत को याद दिलाता कालाआम चौराहा से दिनभर करीब दस हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। जनपद की धड़कन कहे जाने वाले काला आम चौराहा पर शहीद स्मारक है लेकिन ट्रैफिक सिग्नल तक नहीं हैं। चार वर्ष पूर्व 18 लाख रुपये की लागत से लगाए गए थे लेकिन कुछ दिनों बाद ही मामूली खराबी आने के कारण इनकी रोशनी बुझ गई। चौराहे पर यातायात पुलिस और होमगार्ड चौराहे पर खड़े होकर वाहन संचालकों को रुकने और चलने का इशारा करते नजर आते हैं। चालान के लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए यातायात पुलिस के लिए यह चौराहा काफी मुफीद है। चार जिलों की सड़कों को जोड़ने वाला भूड़ चौराहा बगैर सिग्नल लाइट के वीरान है।

कलक्टर और पुलिस कप्तान के कार्यालय के सामने लगता जाम

जिले के कलक्टर के दफ्तर से लेकर पुलिस कप्तान और न्यायालय जिस मार्ग पर हैं वह भी जाम से अछूता नहीं है। रोजाना आला अफसरों की गाड़ियों का सायरन कलक्ट्रेट-कचहरी रोड पर सुनाई देता है। हालांकि आला अफसरों को जाम से बचाने के लिए पुलिसकर्मी पहले से ही मुस्तैद हो जाते हैं, लेकिन अन्य राहगीरों के साथ यहां एंबुलेंस तक जाम की गिरफ्त में नजर आती हैं। यह जानते हुए भी आला चुप्पी साधे रहते हैं। इसके आलावा शहर के काली नदी रोड, डीएवी तिराहे से शिकारपुर बाइपास रोड, मामन चौकी, दिल्ली रोड, अस्पताल रोड आदि पर सड़कों पर जाम का झाम झेलना पड़ता है। यहां अतिक्रमण के साथ डिवाइडर समस्या को और बढ़ा देता है।

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