बुलंदशहर, जेएनएन। आजादी के कुछ साल बाद देश में टिड्डी दल ने आतंक मचाना शुरू कर दिया था। बात अपने जिले की करें तो बड़े-बुजुर्ग किसान बताते हैं कि सन 1968 में टिड्डी दल ने ऐसा कहर जिले के किसानों पर बरपाया कि किसान अगले कई सालों तक संभल नहीं पाए थे। तब लाखों-करोड़ों की संख्या में एक साथ टिड्डी दल ने फसल पर हमला किया और रास्ते में आने वाली हर फसल के साथ बड़े-बड़े पेड़ों को भी चट कर दिया था।

किसान टिड्डी दल के आगमन और होने वाली बर्बादी को लेकर घबराए हुए हैं। बड़े-बुजुर्ग किसानों के सामने एक बार फिर करीब पांच दशक पहले टिड्डी दल द्वारा की गई बर्बादी का मंजर उभर रहा है। किसान बताते हैं कि 1968 में टिड्डी दल ने जिले में आमद दर्ज कराई और किसानों को बरसों पीछे धकेल दिया।

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याद आया मंजर

सन 1968 जून माह में टिड्डी का दल आया था। तब हम जवान थे और अपने पिता, चाचा के साथ फसल को बचाने के लिए खेत पर जाया करते थे। टिड्डी का दल तब मक्का, ज्वार, गन्ना के साथ पेड़ पौधों को नष्ट कर गया था। तब किसानों को फसल को बचाने की जानकारी न के बराबर थी और दवाई आदि भी उपलब्ध नहीं थी। अब एक बार फिर से टिड्डी का दल का आगमन होने से मन घबरा रहा है।

- ओमप्रकाश शर्मा, गांव इलना

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करीब पचास साल पहले आए टिड्डी के दल ने जिले में काफी उत्पात मचाया था। तब किसानों ने टिड्डी के दल को भगाने के लिए अपने खेतों पर जाकर थाली बेला और खाली कनस्तर बजाकर टिड्डी के दल को भगाने का प्रयास करते थे। थाली बेला बजाने के बावजूद भी टिड्डी का दल पूरी तरह से नहीं भागा था। तब टिड्डी दल का असर तीन माह तक रहा था।

- टीकम सिंह, औरंगाबाद

Posted By: Jagran

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