जागरण संवाददाता, बुलंदशहर

डायलिसिस कराने के लिए मेरठ और गाजियाबाद की दौड़ लगाने वाले मरीजों और तीमारदारों के लिए राहतभरी खबर है। जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट बनाने का काम शुरू हो गया है। करीब छह माह में यह बनकर तैयार हो जाएगी। इसके बाद मरीजों को डायलिसिस की सुविधा यहीं पर मिलनी शुरू हो जाएगी।

जिलेभर में प्रतिदिन औसतन 12 से 15 लोगों को डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है। अभी तक जिले के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में डायलिसिस सुविधा उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को मेरठ मेडिकल कालेज जाना पड़ता है। तमाम लोग गाजियाबाद व नोएडा के निजी अस्पतालों में भी पहुंचते हैं।

समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य अफसरों ने करीब आठ माह पहले जिले में डायलिसिस यूनिट बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इस प्रस्ताव को शासन ने पास कर दिया। अब जिला अस्पताल के पुराने ओटी में डायलिसिस यूनिट स्थापित करने का काम शुरू हो गया है। यूनिट का काम पूरा होने में करीब छह माह का समय लगेगा। यूनिट चालू होने के बाद न सिर्फ लोगों का समय और धन बचेगा बल्कि मेरठ और गाजियाबाद की दौड़ लगाने से भी छुटकारा मिलेगा। कुछ मरीजों को तीसरे तो कुछ को पांचवें दिन डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। क्यों कराई जाती है डायलिसिस

जब किडनी की कार्यक्षमता कमजोर हो जाती है तो शरीर से विषैले पदार्थ पूर्णरूप से बाहर नहीं निकल पाते। क्रिएटिनिन और यूरिया जैसे पदार्थों की अधिकता होने पर शरीर में कई प्रकार की समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में मशीन की सहायता से रक्त को साफ किया जाता है। इसी प्रक्रिया को डायलिसिस कहा जाता है। कुछ लोगों की दस दिन तो कुछ की 15 दिन में डायलिसिस होती है। गंभीर रोगियों की डायलिसिस तीसरे और पांचवें दिन भी करानी पड़ती है। स्टाफ की होगी तैनाती

जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना के साथ ही यहां पर नेफ्रोलॉजिस्ट, डायलिसिस असिस्टेंट, स्टाफ नर्स, स्वीपर, वार्ड ब्वाय और मशीन सर्जन आदि की भी तैनाती की जाएगी। इसमें सर्जन, नेफ्रोलॉजिस्ट व डायलिसिस असिस्टेंट नहीं है। शेष पदों के लोग जिला अस्पताल में हैं। प्राइवेट अस्पताल में महंगा खर्च

जिला अस्पताल में सरकार डायलिसिस की सुविधा फ्री देगी जबकि निजी अस्पतालों में एक डायलिसिस का खर्च 1500 से 2000 रुपए आता है। जब जिला अस्पताल में ही डायलिसिस की सुविधा मिलेगी तो यह खर्च बच जाएगा। छह माह में पूरा होगा काम

जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट बनाने का काम शुरू हो गया है। करीब छह माह में इसका काम पूरा हो जाएगा। उसके बाद मरीज और तीमारदारों को गाजियाबाद और मेरठ जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

-डा. केएन तिवारी-सीएमओ

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