'जीरो शुगर' लेबल का भ्रम: पैक्ड फूड खरीदने से पहले ध्यान से पढ़ें कार्बोहाइड्रेट और शुगर की मात्रा
आजकल मधुमेह और प्री-डायबिटिक की समस्या बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, मीठे पेय और ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहे हैं शुगर के नए मामले।
बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड, मीठे पेय मुख्य कारण।
जागरण संवाददाता, बुलंदशहर। हर घर में सुबह सुबह चाय पी जाती है। सुबह की इसी चाय में दो चम्मच चीनी और दिन में काम के दौरान रास्ते में बोतल बंद मीठा पेय, दोपहर में पैकेट वाला नाश्ता और शाम को फास्ट फूड इसी में दिनभर में कब कितनी चीनी शरीर के अंदर पहुंची। इसका पता ही नहीं चलता। स्वाद की यही आदत लोगों को ब्लड शुगर की और ले जाती है। डायबिटीज के बढ़ते आंकड़े बदलती जीवनशैली की ओर इशारा कर रहे हैं।
कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. चर्चित गुप्ता ने बताया कि डायबिटीज की बीमारी अब बुजुर्ग लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। 18 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं में भी शुगर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। हम देखते हैं कि 200 से अधिक डायबिटीज के मरीज ओपीडी में पहुंच रहे है।
बढ़ती डायबिटीज के पीछे खानपान की बदलती आदतें, मीठे पेय पदार्थों का बढ़ता चलन, फास्ट फूड, बढ़ता वजन और शारीरिक गतिविधि में कमी जैसे कारण अहम हैं। स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डाॅ. रमित सिंह का कहना है कि एनसीडी के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि जिले में लगभग 14 प्रतिशत आबादी के डायबिटीज की चपेट में होने और 13 प्रतिशत से अधिक के प्री-डायबिटिक होने का अनुमान है।
आइसीएमआर-आइएनडीआइएबी के अध्ययन में भी उत्तर प्रदेश में डायबिटीज की आयु-समायोजित दर 4.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी। देश में शहरीकरण, मोटापा, कम शारीरिक सक्रियता और बदलते खानपान को डायबिटीज के बढ़ते बोझ से जोड़कर देखा गया है।
पैक्ड खाद्य पदार्थों पर कुल कार्बोहाइड्रेट, अतिरिक्त शर्करा और सामग्री की सूची भी देखें
डाॅ. रमित सिंह कहते हैं कि पैक्ड खाद्य पदार्थों पर जीरो शुगर या शुगर फ्री लिखा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उत्पाद स्वास्थ्यवर्धक है। उपभोक्ताओं को लेबल पर कुल कार्बोहाइड्रेट, अतिरिक्त शर्करा और सामग्री की सूची भी देखनी चाहिए। डब्ल्यूएचओ फ्री शुगर को कुल ऊर्जा के 10 प्रतिशत से कम रखने की सलाह देता है और पांच प्रतिशत से कम करने से अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ की संभावना बताता है।
रोजमर्रा की आदतों से बचाव की शुरूआत
मेडिकल कालेज की प्रधानाचार्य डा. संगीता अनेजा का कहना है कि मीठे पेय और अतिरिक्त चीनी कम करना, नियमित शारीरिक गतिविधि बढ़ाना, वजन पर नजर रखना और समय-समय पर रक्त शर्करा की जांच कराना जोखिम कम करने में मदद कर सकता है। परिवार में डायबिटीज का इतिहास हो या लक्षण मौजूद हों तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
