ईयरफोन का इस्तेमाल, बार-बार संक्रमण व समस्या की अनदेखी... सुनने की क्षमता पर इन कारणों से पड़ रहा बुरा प्रभाव
बुलंदशहर में बरसात और उमस के कारण कान में फंगल संक्रमण के मामले बढ़े हैं, जहां मरीज खुजली और दर्द ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
बरसात में कान के फंगल संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं।
घरेलू नुस्खे अपनाने से कान की समस्या और गंभीर हो रही।
कान की तकलीफ पर तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लें।
जागरण संवाददाता, बुलंदशहर। लगातार बरसात और उमस के मौसम में कान में फंगल संक्रमण लोगों को परेशान कर रहा है। कान में खुजली और दर्द की शिकायत लेकर मरीज कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कालेज की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। अस्पताल जाने के बजाए स्वयं ही घरेलू नुस्खे अपनाने पर यह समस्या और ज्यादा बढ़ रही है। चिकित्सक दवा के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
मेडिकल कालेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. मेघल चौधरी ने बताया कि इन दिनों ओपीडी में कान से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। हर चौथा मरीज फंगल संक्रमण का शिकार होकर ओपीडी में आ रहा है। कई मरीज ऐसे भी आ रहे हैं जो पहले घरेलू उपचार करते हैं और जब परेशानी बढ़ जाती है, तब अस्पताल पहुंचते हैं। इलाज में देरी के कारण संक्रमण गंभीर हो जाता है। कई बार कान के पर्दे को भी नुकसान पहुंच रहा है। कान में खुजली, दर्द या पानी आने पर लोग डाक्टर के पास जाने के बजाय सरसों का तेल या अन्य घरेलू नुस्खे अपनाते हैं। इससे कान के भीतर नमी बढ़ जाती है और फंगस तेजी से फैलने लगता है।
संक्रमण बढ़ने पर कान को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि बच्चों और युवाओं में भी सुनने की क्षमता कम होने की शिकायतें बढ़ रही हैं। बार-बार होने वाला संक्रमण, तेज आवाज में लंबे समय तक ईयर फोन का इस्तेमाल, कान में नुकीली वस्तु डालना और समय पर उपचार नहीं कराना इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि कान में किसी भी प्रकार की तकलीफ होने पर स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। सीएमएस डा. प्रदीप राणा का कहना है कि कान शरीर का बेहद संवेदनशील अंग है।
बिना चिकित्सकीय सलाह के तेल, ड्राप या अन्य पदार्थ डालने से लाभ के बजाय नुकसान हो सकता है। सही समय पर जांच और उपचार से फंगल संक्रमण ठीक किया जा सकता है और सुनने की क्षमता को होने नुकसान से बचाया जा सकता है। फंगस के लक्षण: कान बंद होने जैसा महसूस होना, दुर्गंध आना, गंभीर स्थिति में कान का पर्दा प्रभावित होना, कान में लगातार खुजली होना, दर्द या जलन महसूस होना, कान से पानी पानी, मवाद या काला-सफेद स्राव निकलना आदि।
ऐसे करें बचाव
ईयरबड, माचिस की तीली या नुकीली वस्तु से कान साफ न करें।
नहाने या तैराकी के बाद कान अच्छी तरह सुखाएं।
तेज आवाज में लंबे समय तक ईयर फोन का इस्तेमाल न करें।
कान में सरसों का तेल या कोई घरेलू नुस्खा न अपनाएं।
कान को साफ और सूखा रखें।
