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बिबकोल की 76 एकड़ जमीन पर अब नए प्रोजेक्ट की संभावना, कैबिनेट ने बंदी को दी मंजूरी

Published: Sun, 20 Sep 2026 10:30 PM (IST)

केंद्रीय कैबिनेट ने बिबकोल की बंदी को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद कंपनी के 76 एकड़ जमीन पर अब नए प्रोजेक्ट आने की संभावना है।

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HighLights

  1. केंद्रीय कैबिनेट ने बिबकोल की बंदी के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

  2. कंपनी के पास चोला और गंगेरूआ में कुल 76 एकड़ जमीन है।

  3. जेवर एयरपोर्ट के पास होने से जमीन पर नए प्रोजेक्ट की संभावना।

अमर सिंह राघव, बुलंदशहर। चोला स्थित भारत इम्यूनोलाजिकल्स एंड बायोलाजिकल्स कार्पोरेशन लिमिटेड (बिबकोल) प्रतिष्ठित कंपनी का देश से पोलियो के उन्मूलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

बिबकोल की बंदी के प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर लगने के बाद कंपनी के कर्ज अदायगी व कर्मचारियों का बकाया वेतन-भत्ता के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कंपनी में 2022 से प्रोडेक्शन बंद था। बिबकोल की जमीन पर नए प्रोजेक्ट आने की भी संभावना जताई जा रही है।

सिकंदराबाद तहसील के चोला में साल 1989 में 70 एकड़ जमीन पर भारत इम्यूनोलाजिकल्स एंड बायोलाजिकल्स कार्पोरेशन लिमिटेड (बिबकोल) कंपनी की स्थापना की गई थी, जिसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली पोलियोरोधी ओरल पोलियो वैक्सीन उत्पादन और आपूर्ति में राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाना था। कंपनी ने पोलियो ओरल वैक्सीन के साथ ही जिंक टेबलेट, डायरिया मैनेजमेंट किट का भी उत्पादन किया था।

70 एकड़ के एरिया में बिबकोल कंपनी की इमारत

बिबकोल कंपनी के बंदी के प्रस्ताव पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी थी। चोला में 70 एकड़ के एरिया में बिबकोल कंपनी की इमारत खड़ी है। जबकि शहर के गंगेरूआ में गंगेरूआ फ्लाईओवर के निकट लगभग छह एकड़ ग्रुप हाउसिंग की जमीन है। प्रतिष्ठित कंपनी पर बैंक, कर्मचारियों को बकाया वेतन-भत्ते समेत अन्य मदों में लगभग 130 करोड़ से अधिक का कर्ज है।

अब कंपनी की बंदी की प्रक्रिया को अमलीजाला पहनाने के लिए कवायद शुरू हो जाएगी। कर्मचारियों का दावा है कि दो साल पहले कंपनी की ग्रुप हाउसिंग की छह एकड़ जमीन को एक निजी कंपनी को 99 साल के लिए लीज पर दे दिया गया था।

नई रेल लाइन और फोरलेन सड़क बनाना भी प्रस्तावित

बिबकोल की जमीन पर कोई नया प्रोजेक्ट आने की भी संभावना व्यक्त की जा रही है। चोला की जेवर एयरपोर्ट से लगभग 12 किलोमीटर दूरी है। चोला को जंक्शन बनाने के साथ ही चोला से जेवर एयरपोर्ट तक नई रेल लाइन और फोरलेन सड़क बनाना भी प्रस्तावित है। इस लिहाज से बिबकोल की जमीन बहुत ही महत्वपूर्ण है।

प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों सहकारी नगर स्थित कताई मिल की जमीन को पिछले दिनों यूपीएसआइडीसी को हस्तांतरित कर दिया था। जिस पर औद्योगिक गलियारा विकसित किया जाएगा। भविष्य में बिबकोल की जमीन पर किसी बड़े प्रोजेक्ट की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

कंपनी के बंद होने के प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद अब कर्मचारियों के देयकों के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कंपनी के पास 76 एकड़ जमीन है। कोई नया प्रोजेक्ट भी यहां आ सकता है।

-हेमंत कौशिक, अध्यक्ष बिबकाल एम्पलाइज क्रांतिकारी यूनियन

बिबकोल के पास 76 एकड़ जमीन, अब नए प्रोजेक्ट की संभावना

कर्मचारियों का दावा है कि साल 2016 तक बिबकोल 70 करोड़ रुपये के फायदे में थी। 2001-02 तक 150 स्थाई व 150 अस्थाई समेत 300 कर्मचारी तैनात थे। 2017- 2022 तक डिपार्टमेंट आफ बायोटेक्नोलाजी (जैव प्रोद्योगिकी) के संयुक्त सचिव को बिबकाल के एमडी का अतिरिक्त चार्ज मिला था। तभी से कंपनी घाटे में जाने शुरू हो गई।

पांच साल में कंपनी में उत्पादन बंद होने के साथ ही प्रतिष्ठित कंपनी 125 करोड़ से अधिक के घाटे में चली थी। 2023 से कर्मचारियों को वेतन भी नहीं मिला है और न ही इन कर्मचारियों को मर्ज किया गया है।

वर्तमन में कंपनी में 68 कर्मचारी है। यदि अधिकारी गंभीरता से काम करते तो प्रतिष्ठित कंपनी की बंदी की नौबत नहीं आती। बहराल कुछ भी बिबकोल अब सिर्फ इतिहास के पन्नों तक सिमट जाएगी।