World Arthritis Day: सावधान! गठिया अब सिर्फ उम्रदराज लोगों की बीमारी नहीं, युवा भी इससे परेशान; बचाव को डाॅक्टर के टिप्स
World Arthritis Day 2026: गठिया पहले बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन अब 30-35 वर्ष के युवाओं को भी ...और पढ़ें

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HighLights
गठिया अब 30-35 वर्ष के युवाओं को भी प्रभावित कर रही।
निष्क्रिय जीवनशैली, मोटापा और गलत खानपान मुख्य कारण।
जगमोहन शर्मा, बुलंदशहर। World Arthritis Day 2026: आर्थराइटिस यानि गठिया की समस्या दो से तीन दशक पहले तक 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब जोड़ों में दर्द और सूजन की यह समस्या 30 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं को चपेट में ले रही है।
निष्क्रिय जीवनशैली, घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, बढ़ता वजन और असंतुलित खानपान जोड़ों के तेजी से घिसना इस बीमारी का मुख्य कारण हैं। जागरूकता के लिए हर साल 12 अक्टूबर को विश्व आर्थराइटिस दिवस मनाया जाता है।
कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कालेज के हड्डी रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. गौरव देव शर्मा ने बताया कि आर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली सूजन है, जिससे दर्द और अकड़न जैसी समस्याएं होती हैं। यह उम्र बढ़ने, जेनेटिक्स, पुरानी चोटों और इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी जैसी वजहों से होता है।
बुढ़ापे में होने वाली ये दिक्कत आजकल बिगड़ते खानपान और बदलती लाइफस्टाइल के कारण जवां उम्र में भी हो रही है। 30 से 35 वर्ष की आयु वाले युवा इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। कुछ मामलों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल का जमा होने(गाउट) या संक्रमण और चोटें इसका कारण भी आर्थराइटिस देखने को मिल रही है।
साथ ही उम्र बढ़ने, मोटापा, आनुवंशिकता और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा रहे हैं। नियमित पैदल चलना, साइकिल चलाना और तैराकी जैसे अभ्यास से इससे बचा जा सकता है।
हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. हिमांशु गौड़ का कहना है कि गठिया को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन सही लाइफस्टाइल की मदद से इसे मैनेज कर सकते हैं। गठिया के कारण जोड़ों के साथ-साथ धमनियों को भी नुकसान पहुंचता है। इसलिए इसके कारण हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।
गठिया के मरीजों को नियमित रूप से दवा और डाक्टर से सलाह लेते रहना चाहिए, ताकि सूजन और हार्ट से जुड़ी परेशानियों को मैनेज किया जा सके। गठिया को मैनेज करने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार करना भी जरूरी है।
इसके लिए डाइट में फल, सब्जिया, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन (कम वसा वाला प्रोटीन) लें, ताकि कोलेस्ट्राल कम करने में मदद मिल सके। साथ ही नियमित एक्सरसाइज करें। स्मोकिंग न करें तनाव से बचें और ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें।
