बुलंदशहर, जेएनएन। देश में प्राचीन काल से ही आयुर्वेद पद्धति से इलाज किया जाता रहा है लेकिन अब चिकित्सकों की मनमानी से आयुर्वेद सेवा लड़खड़ा रही है। जिलेभर में पंजीकृत आयुर्वेद के चिकित्सक भी मरीजों को एलोपैथिक दवाएं दे रहे हैं। आयुर्वेदिक एवं युनानी विभाग के अधिकारी इस पर यदि कोई नोटिस भी जारी करते हैं तो चिकित्सक प्रभावशाली लोगों से फोन कराकर दबाव बनवाते हैं।

जिलेभर में आयुर्वेद के इलाज के 384 निजी चिकित्सक पंजीकृत हैं लेकिन इनमें से 90 फीसद से भी अधिक चिकित्सक एलोपैथिक की दवाएं ही बांट रहे हैं। हालांकि एलोपैथी की दवा देने का मामला पिछले काफी सालों से चल रहा है लेकिन अब क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं युनानी अधिकारी ने इस पर अंकुश लगाने के लिए चेकिग अभियान चलाया। चेकिग के दौरान कुछ चिकित्सक दुकानें बंद करके दाएं-बाएं हो गए, जबकि अधिकांश ने चेकिग का विरोध किया। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं युनानी अधिकारी ने जब आयुर्वेदिक के बजाए एलोपैथी से इलाज करने का कारण जानने के लिए नोटिस जारी किया तो कई चिकित्सकों ने राजनीतिक व अन्य प्रभावशाली लोगों से फोन करवा दिए। ऐसे में इनके खिलाफ कार्रवाई करने से अधिकारी कतरा रहे हैं। शहर से देहात तक एलोपैथी दवाओं से ही आयुर्वेदिक चिकित्सक इलाज कर रहे हैं। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं युनानी अधिकारी डा. विजय झालानी का कहना है कि जब रजिस्ट्रेशन आयुर्वेदिक विभाग में है तो इलाज आयुर्वेद से ही होना चाहिए। नोटिस का जवाब देने के बजाए प्रभावशाली लोगों से फोन कराते हैं। परेशान होकर अब मुख्य चिकित्साधिकारी आफिस को ऐसे चिकित्सकों की सूची भेजी जाएगी। सूची तैयार करवाई जा रही है।

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस