बुलंदशहर, जेएनएन। खुर्जा में रामलीला महोत्सव कमेटी द्वारा इस बार मंचन का आयोजन किया गया। आज यानि शुक्रवार को केवल रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। जिसको लेकर कमेटी द्वारा तैयारियां कर ली गईं।

कोरोना से पहले जहां रामलीला महोत्सव के मेले का आयोजन किया जाता था और मंचन भी होता था। जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग प्रतिदिन पहुंचते थे, लेकिन कोरोना के चलते दो वर्षों से महोत्सव की रौनक गायब है। इस बार भी प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण रामलीला का मंचन नहीं किया गया। हालांकि शुक्रवार को आज विजयादशमी के पर्व पर रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। जहां पूर्व में 50 से अधिक फुट ऊंचे पुतले का दहन होता था। वहीं इस बार महज 12 फुट का पुतला तैयार किया गया है। श्रीरामलीला महोत्सव कमेटी के अध्यक्ष उमांशकर ने बताया कि जंक्शन मार्ग स्थित चित्रकूट पर सुंदरकांड का पाठ होगा और उसके बाद रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। हनुमान ने पूंछ से लगाई लंका में आग, मचा हाहाकार

गुलावठी। रामलीला मैदान में चल रही रामलीला मंचन में बुधवार रात लंका दहन, रामेश्वरम पूजा, सेतु बंध की लीला का मंचन किया गया। इसमें वृंदावन के कलाकारों द्वारा दिखाया गया कि हनुमान रावण की लंका में पहुंच जाते है और अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट करते है। हनुमान वाटिका से फल तोड़कर खाने लगते है। सैनिकों के रोकने पर हनुमान वाटिका को उजाड़ देते है। मेघनाथ हनुमान को बंधक बनाकर रावण के दरबार में पहुंचते है। जहां पर रावण हनुमान की पूंछ में आग लगाने का आदेश देता है। जिसके बाद हनुमान पूंछ में लगी आग से रावण की सोने की लंका जला देता है। रावण की लंका धूं-धूं कर जल उठी।हनुमान की वापसी के बाद राम की सेना रामेश्वरम की स्थापना कर लंका में समुद्र तट पर पहुंच जाती है। जहां विचार विमर्श के बाद अंगद को रावण को समझाने के लिए लंका भेजा गया।

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