यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 04, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मनमाने तरीके से बनाए जा रहे प्रमाण पत्र

अश्विनी भारद्वाज, अनूपशहर, (बुलंदशहर) : पिछले दिनों जाति प्रमाण पत्रों में नरेंद्र मोदी का फोटो व पोर्न स्टार सनी लियोन लिखे होने का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा कि लोकवाणी केंद्र के कई और मामले प्रकाश में आए हैं। आय प्रमाण पत्रों के इन मामलों में भारी अनियमितता, फर्जीवाड़ा और कर्मियों का भ्रष्टाचार साफ दिख रहा है। वहीं तहसीलदार ने भी जांच कराकर कार्रवाई करने का घिसा-पिटा सा जवाब देकर अपने कार्य की इतिश्री कर ली।
प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के नागरिकों को आय, जाति, मूल प्रमाण पत्र को सहूलियत से बनवाने के लिए जन सुविधा केन्द्र खोलकर बीस दिन में बिना भागदौड़ के प्रमाण पत्र मुहैया कराने के लिए प्रत्येक तहसील पर क ई लोगों को अधिकृत किया है। अनूपशहर तहसील में इस कार्य में लगे कर्मचारियों की मिलीभगत का आलम यह है कि वे फार्म को पढ़ने और जांच की जहमत तक नहीं उठाते। इसमें उनकी कार्यशैली और भ्रष्टाचार साफ दिखाई दे रहा है। अभी दो दिन पूर्व ही जाति प्रमाण पत्रों के एक फार्म पर जहां नरेंद्र मोदी का फोटो लगा था तो दूसरे में पोर्न स्टार कु. सनी लियोन निवासी तंग गली, भट्ट मोहल्ला, मुंबई लिखा था। मामले में तहसीलदार ने संबंधित लेखपाल और कर्मियों से जवाब-तलब भी किया था।
वहीं अब आय प्रमाण पत्रों में भारी गड़बड़ी पकड़ में आई है। गांव पचदेवरा निवासी अशोक शर्मा सरकारी कर्मचारी है, लेकिन उसके पुत्र चेतन शर्मा के आय प्रमाण पत्र मात्र तीन हजार रुपये आय दर्शाई गई है। वहीं ठीक चार दिन बाद इसी व्यक्ति के दूसरे आय प्रमाण पत्र में उसकी आय मात्र 1900 रुपये दिखाई गई है।
नियमानुसार छह माह तक किसी व्यक्ति की आय में परिवर्तन नहीं किया जाता है। यही नहीं विनोद कुमार पुत्र विजय पाल निवासी गांव इन्दौर खेड़ा, तहसील डिबाई का जाति प्रमाण पत्र अनूपशहर से जारी कर दिया गया। राशिद पुत्र जाहिद निवासी मोरीगेट अनूपशहर को जाति प्रमाण पत्र में यदुवंशीय जाति का दिखाया गया है, जबकि इस जाति का अनूपशहर में कोई व्यक्ति है ही नहीं। इसी तरह शिव कुमार, रोहित कुमार, सुभाष चंद, रोविन्द्र सिंह के जाति प्रमाण पत्र में नट जाति निवासी गण गांव अंधियार व डबका दर्शाया गया है, जबकि इन गांवों में नट जाति के लोग नहीं हैं।
जनसुविधा केन्द्र संचालक द्वारा ऑनलाइन आवेदन फारवर्ड किया जाता है। लेखपाल से जांच कराकर रिपोर्ट लगाने का कार्य तहसील स्तर से कराया जाता है। रिपोर्ट लगे कागज भी तहसील के रिकार्ड में रखे जाते हैं। तहसील कर्मियों द्वारा उपरोक्त रिपोर्ट के कागज लेखपाल को न देकर स्वयं ही फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते हैं।
इस फर्जीवाड़े पर तहसीलदार अजय कुमार अम्बष्ट का कहना है कि वह मामले की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई कराएंगे।
