जेएनएन, बिजनौर। धामपुर में विश्व हिदू महासंघ के प्रदेश मंत्री एवं पूर्व विधायक डा. इंद्रदेव सिंह के संयोजन में महासंघ के संस्थापक व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ तथा डा. दुर्गा सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान हिदू समाज की एकता और गोवंश की रक्षा पर जोर दिया गया।

ग्राम सुहागपुर स्थित डा. दुर्गा सिंह स्मारक कन्या इंटर कालेज में सोमवार को हुए आयोजन में विश्व हिदू महासंघ के प्रदेश मंत्री व पूर्व विधायक डा. इंद्रदेव सिंह ने कहा कि हिदू समाज की विभिन्न समस्याओं के समाधान और एकता के लिए महंत अवैद्यनाथ द्वारा वर्ष 1980 में नेपाल में विश्व हिदू महासंघ की स्थापना की गई थी। वह महासंघ के पहले अध्यक्ष बने। डा. इंद्रदेव सिंह ने कहा कि गाय को माता मानने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंश की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है। डा. दीप सौरभ सिंह पार्थ ने भी महंत अवैद्यनाथ तथा डा. दुर्गा सिंह के जीवन पर प्रकाश डाला और उनके विचारों को ग्रहण करने का आह्वान किया। सरदार पूणे सिंह की अध्यक्षता और राजेंद्र सिंह के संचालन में हुए कार्यक्रम में कामेश्वर राजपूत, शरद चंद्र शर्मा, नरेंद्र सिंह अनाम, चौधरी राजेंद्र सिंह, मदन पाल सिंह, श्याम जी महाराज, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, राजीव चौहान, केके शर्मा, गोपाल सिंह मौजूद रहे।

तीर्थंकर महावीर का पालना झुलाया

नजीबाबाद में श्री दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में दशलक्षण पर्व के मौके पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में महावीर का पालना कार्यक्रम किया गया। बालकलाकारों ने महावीर के जन्म कल्याणक को लेकर नाटकीय मंचन किया।

श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में बाजे कुंडलपुर में बधाई कि धरती पर वीर जन्मे महावीर जी से वातावरण गुंजायमान हो गया। श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में निदेशक मंजू जैन व कुमकुम जैन के निर्देशन तीर्थंकर महावीर का गरज कल्याणक से लेकर जन्म कल्याणक का मंचन किया गया। जिसमें माता त्रिशला को 16 स्वपन दिखाई देते है। जिनको वे अपने पति के सामने रखती है तो वे कहते हैं कि धरती पर तीर्थंकर का जन्म होने वाला है और उसके बाद सौधर्म इन्द्र व इन्द्राणी नृत्य कर उत्साह से गान करते है और इन्द्र बालक के जन्म पर उनको पांडुकशिला पर लेजा कर उनका अभिषेक करते हैं। श्रद्धालुओं ने महावीर को पालना झुलाते है। बाल कलाकारों में शुद्धि, आसमी, शिव, स्वस्ति, अवनी आदि शामिल रहे।

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