सचिन शर्मा, चांदपुर(बिजनौैर): भ्रष्टाचार और भ्रष्ट तंत्र समाज के लिए अभिशाप बन चुका है। लेकिन आरटीआइ (राइट टू इन्फार्मेशन) इस समस्या के लिए अचूक हथियार है। नगर निवासी वीरेंद्र राजपूत आरटीआइ के जरिए भ्रष्ट तंत्र से लड़ाई लड़ रहे हैं। वह सूचना के अधिकार से कई विभागों में दीमक की तरह जमी भ्रष्टाचार की परतों सबके सामने ला चुके हैं।

मोहल्ला गोकुल नगर निवासी वीरेन्द्र राजपूत ने इस जंग की शुरुआत 2008 से की। उनका मानना है कि आरटीआइ भ्रष्ट तंत्र को सबक सिखाने व वंचित वर्ग को अपना हक दिलाने के लिए हथियार से कम नहीं है। उन्होंने सरकारी विभाग जैसे शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, पुलिस, नगरपालिका, पूर्ति विभाग जैसे विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर किया है। आरटीआइ का सहारा लेकर वीरेंद्र राजपूत ने लोगों की समस्याओं के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने सबसे पहले कृषि उत्पादन मंडी समिति में पशुओं के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई। इस पर कार्रवाई भी हुई। अवैध मछली बाजार को लेकर आरटीआइ मांगी तो अधिकारी हरकत में आए और अवैध बाजार बंद हुआ। इस प्रकरण में पीपुल्स फॉर एनिमल्स की अध्यक्ष मेनका गांधी से लेकर राज्यपाल तक के जवाब आए। उसके बाद पीडब्ल्यूडी मार्ग पर लगने वाली अवैध मीट की दुकानों का मामला हो या फिर नगर पालिका में भ्रष्टाचार का। आरटीआइ के साथ उन्होंने धरना-प्रदर्शन भी किया। जिसके बाद कार्रवाई और सुनवाई भी हुई। तो गत वर्ष 29 मई 2017 को नगर पालिका चांदपुर से वर्ष 2016-17 में कली चूना, क्लोरोक्वीन व कीटनाशक के संबंधित खरीद फरोख्त, पालिका के सौजन्य से चल रहे पंजीकृत वाहनों की संख्या व उन पर होने वाले खर्च आदि की जानकारी लेनी चाही। लेकिन, पालिका ने उन्हें जवाब नहीं दिया। तब उन्होंने उत्तर प्रदेश सूचना आयोग लखनऊ का दरवाजा खटखटाया। जिस पर सूचना आयुक्त ने नगर पालिका चांदपुर के ईओ को तलब किया है। इसके अलावा कई मामलों में पुलिस प्रशासन की समस्याओं के लिए भी शासन से जवाब मांगा तो मुचलका पाबंदी पर भी सूचना मांगी।

इंडिया अगेंस्ट करप्शन से हुए सम्मानित

उन्हें वर्ष 2010 में इंडिया अगेंस्ट करप्शन संस्था के द्वारा पुरस्कृत भी किया गया। प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे, किरण बेदी व स्वामी अग्निवेश जैसी नामचीन हस्तियों ने उन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

कई अधिकारियों को दिखाई राह

सूचना का अधिकार के जरिए वीरेंद्र राजपूत ने भ्रष्ट अधिकारियों की जहां पोल खोली, वहीं उन्हें ईमानदारी से कार्य करने की राह भी दिखाई। कई मामलों में बार-बार आरटीआई मांगने के बावजूद सूचना न देने के विरोध में संबंधित विभागों या अधिकारी को आयोग तक का रास्ता दिखा दिया। जो बाद में लाइन पर आ गए। वीरेंद्र राजपूत ने बताया कि भ्रष्टाचार से पीड़ित कई लोग उनसे सहायता ले चुके हैं। साथ ही दूर-दूर से लोग फोन के जरिए जानकारी लेते रहते हैं।

Posted By: Jagran