बिजनौर, जेएनएन। दिन की शुरुआत अगर योग से हो तो दिनचर्या के दौरान शारीरिक और मानसिक कष्टों से निजात मिलती है। यह दावा है उन लोगों का जो नियमित योग करते हैं और असाध्य रोगों से निजात पा चुके हैं।

बदलती जीवन शैली ने जहां दिनचर्या को सरल बनाया है, वहीं कई स्वास्थ्य अवरोध भी पैदा किए हैं। इन अवरोध को समय रहते भांपकर योग-प्राणायाम से दिन की शुरुआत करना जरूरी हो गया है। नियमित योग-प्राणायाम ने लेखपाल कमल शर्मा को न केवल असाध्य रोग से मुक्ति दिलाई, बल्कि उन्हें योग शिक्षक भी बना दिया। कमल शर्मा बताते हैं कि वे शुगर के मरीज थे और उनकी रीढ़ की हड्डी में परेशानी थी। उठने-बैठने, चलने-फिरने में दिक्कत थी। कुछ ही वर्षों की योग साधना ने बगैर दवा और बगैर आपरेशन उनकी रीढ़ की हड्डी की समस्या समाप्त कर दी। कमल शर्मा अब कठिन से कठिन आसन बड़ी सरलता से कर लेते हैं।

आदर्शनगर निवासी प्रमोद राजपूत के घुटनों में समस्या आने पर चिकित्सकों ने आपरेशन करा लेने की सलाह दी थी। प्रमोद राजपूत ने कमल शर्मा की देखरेख में नियमित योगाभ्यास किया। अब वे बगैर थके और बगैर दर्द पैदल चल लेते हैं। जयनगर निवासी ओमपाल सिंह एक हादसे के बाद घुटनों के जाम होने की समस्या से जूझ रहे थे। उन्होंने नियमित योगाभ्यास कर घुटनों को ठीक कर लिया। वाहिदनगर निवासी कारोबारी गौरव अग्रवाल वजन बढ़ने, सांस फूलने और चलने-फिरने में परेशानी की समस्या से जूझने लगे थे। नियमित योगासन कर अब गौरव रोजाना करीब 10-12 किलोमीटर पैदल चलते हैं और हर समस्या से निजात पा चुके हैं। समाचार पत्र विक्रेता एवं कारोबारी विष्णुदत्त गुप्ता पिछले कई वर्षों से हाथ-पांव में दर्द, पेट में सूजन, सिर दर्द की समस्या से जूझ रहे थे। तीन वर्षों से नियमित योगासन कर समस्या से निजात पा चुके हैं। -बैठकर किए जाने वाले योगासन

वज्रासन, शशांकासन, मत्स्येंद्र आसन, अ‌र्द्धमत्स्येंद्र आसन, वक्रासन -खड़े होकर किए जाने वाले योगासन

ताड़ासन, चक्रासन, हस्तोत्थान आसन, वृक्षासन, गरुड़ासन, कटिचक्रासन

Edited By: Jagran