जेएनएन, बिजनौर। बुराई पर अच्छाई की जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला विजयादशमी पर्व प्रतिवर्ष आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। विजयादशमी पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन शस्त्र पूजा का विशेष महत्व होता है।

शास्त्रों के अनुसार विजयादशमी के दिन महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा और मर्यादा पुरुषोत्तम राम की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा बताते हैं कि दुर्गा पूजन करने से आदिशक्ति मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। इससे जीवन में आने वाली विषमताएं, परेशानियां, कष्ट और दरिद्रता का नाश होता है। भगवान श्रीराम की पूजा करने से धर्म के मार्ग पर चलने वालों को विजय प्राप्त होती है। नवग्रहों को नियंत्रित करने के लिए विजय दशमी पूजा का विशेष महत्व है। किसी भी नए काम को प्रारंभ करने के लिए यह दिन अतिउत्तम होता है। शुभ मुहूर्त का समय

14 अक्टूबर को शाम छह बजकर 53 मिनट दशमी प्रारंभ होगी, जबकि 15 अक्टूबर को शाम छह बजकर तीन मिनट पर समाप्त होगी। दो बजकर दो मिनट से दो बजकर 48 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा। अपराह्न पूजा दोपहर एक बजकर 16 मिनट से तीन बजकर 33 मिनट तक की जा सकती है। राहुकाल सुबह 10.30 मिनट से दोपहर 12 बजे तक होगा। राहुकाल में पूजन करना अशुभ माना जाता है। विजय मुहूर्त में पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है। भगवान श्रीराम ने रावण को हराने के लिए इसी मुहूर्त में युद्ध प्रारंभ किया था। क्षत्रिय एवं योद्धा इस दिन शस्त्रों की पूजा-अर्चना करते हैं।

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