नजीबाबाद (बिजनौर): भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज के कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्रमुख वीरेश भीम अनार्य ने कहा कि रामायण के रचयिता भगवान वाल्मीकि को वाल्मीकि समाज भूलता जा रहा है। यह चिता का विषय है। उन्होंने भगवान वाल्मीकि के आश्रम को तीर्थस्थल के समान पूजने का आह्वान किया।

रविवार को भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज के कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्रमुख वीरेश भीम अनार्य ने कहा कि भगवान वाल्मीकि जिस आश्रम में रहते थे, वहां माता सीता ने वनवास के समय जीवनयापन किया। वहां लव-कुश का जन्म तथा उनकी शिक्षा-दीक्षा हुई। जिस पवित्र स्थान पर सांप-नेवला, शेर-बकरी एक ही घाट पर पानी पीते थे, उस स्थान से समस्त वाल्मीकि समाज अनभिज्ञ है। भगवान वाल्मीकि का आश्रम उत्तराखंड के रामनगर से 25 किमी दूर घने जंगल में है। जिसे सीतावनी के नाम से जाना जाता है। रामायण में भी इस बात का वर्णन किया गया है। वाल्मीकि समाज की ओर से हर वर्ष 26 अप्रैल को वहां श्रद्धापर्व का आयोजन किया जाता है।

राष्ट्रीय महासचिव वीर नीरज पाराशर ने कहा कि जब हम अन्य तीर्थ स्थलों पर जा सकते हैं तो वाल्मीकि तीर्थ पर भी जाना चाहिए। संगठन के सदस्य संदीप कुमार ने 26 अप्रैल को वाल्मीकि समाज से धर्मस्थल पर पहुंचने की अपील की। जिलाध्यक्ष वीर रूपेश कुमार ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में कपिल सिसौदिया, दीपचंद, विनोद कैशले, बिट्टू, रतन कुमार, रोहित, कन्हैयालाल, रूपेश वैद्य, बॉबी, वरूण, दीपक, चतरपाल आदि उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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