जेएनएन, बिजनौर। संसाधनों के अभाव में पिछले करीब दो माह से जिला अस्पताल में एक भी नेत्र आपरेशन नहीं हुआ है। यदि नेत्र आपरेशन में काम आने वाली दवाएं एवं इंजेक्शन आदि नहीं मिले तो लक्ष्य पूरा होना मुश्किल हो जाएगा।

कोरोना के मरीजों की संख्या में कमी आने पर शासन ने सरकारी अस्पतालों में आपरेशन एवं गंभीर रोगियों के लिए ओपीडी शुरू कर दी थी। जिला अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों नेत्र रोगी पहुंच रहे हैं। जांच के बाद कई रोगियों की आंखों में सफेद मोतियाबिद होने के कारण उन्हें आपरेशन की आवश्यकता है, लेकिन दवाओं एवं लैंस आदि नहीं होने के कारण नेत्र रोगियों को मासूस लौटना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में वर्तमान में डा. मनोज सेन और डा. रजनीश शर्मा दो नेत्र सर्जन कार्यरत हैं। दोनों ने वर्ष 2020-21 में कोरोना काल के बावजूद लक्ष्य 1400 के सापेक्ष 1709 आपरेशन किए। जिला अस्पताल में चालू वर्ष में आखिरी नेत्र आपरेशन 21 अप्रैल को किया गया, लेकिन इसके बाद नेत्र आपरेशन के दौरान काम आने वाली दवाएं, सीरिज एवं लेंस आदि समाप्त हो गए। नेत्र आपरेशन के लिए आवश्यक दवाएं आदि उपलब्ध नहीं होने के कारण नेत्र आपरेशन नहीं हो पर रहे हैं। इसका मुख्य कारण डिमांड भेजे जाने के बावजूद दवाएं नहीं मिल पाना है। बताते हैं कि दवा सप्लाई के लिए जिस कम्पनी का टेंडर था, उसकी अवधि 31 मार्च 2021 को पूरी हो गई थी। इस कारण कम्पनी ने दवा भेजना बंद कर दिया। इस संबंध में नेत्र सर्जन डा. मनोज सेन जिलाधिकारी से मिलकर उनसे नए टेंडर होने तक पिछली कम्पनी द्वारा दवाओं की सप्लाई कराने के निर्देश देने की अनुमति मांगी थी। सीएमएस डा. अरुण पांडेय का कहना है कि सीएमओ से मिल कर जल्द ही नेत्र आपरेशन में काम आने वाले संसाधनों की पूर्ति की जाएगी। जिला अंधता निवारण समिति के नोडल अधिकारी डा. एसके निगम का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से टेंडर नहीं हुआ है। एक ही कम्पनी लगातार तीन वर्षों से संसाधनों की सप्लाई कर रही है। ऐसे में फिर से कम्पनी की समायावधि बढ़ाना उचित नहीं है। डीएम के निर्देश पर आपूर्ति के लिए जल्द ही टेंडर लिया जाएगा।

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