फिल्मी स्टाइल में करते थे वन क्षेत्र से खैर की लकड़ी चोरी; दारोगा को कुचलने का किया प्रयास, तीन गिरफ्तार
बिजनौर पुलिस ने वन क्षेत्र से खैर की लकड़ी चोरी करने वाले गिरोह के सरगना समेत तीन सदस्यों को गिरफ्तार ...और पढ़ें

पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस वार्ता में खैर की लकड़ी चोरी के बारे में जानकारी देते एएसपी सिटी। जागरण
HighLights
'पुष्पा' फिल्म की तर्ज पर करते थे चोरी।
वन दारोगा को कुचलने का किया प्रयास।
जागरण संवाददाता, बिजनौर। नजीबाबाद पुलिस ने वन क्षेत्र से खैर की लकड़ी चोरी करने वाले गिरोह के सरगना समेत तीन को गिरफ्तार किया है। आरोपितों ने चोरी के समय वन दारोगा को कुचलने का प्रयास किया था। आरोपित पुष्पा फिल्म की तर्ज पर लकड़ी चोरी करते थे। पुलिस ने आरोपितों को जेल भेज दिया है। ठेकेदार समेत पांच आरोपित अभी फरार हैं।
साहनपुर रेंज के वन दारोगा सार्थक ने पांच अक्टूबर को वन क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। उसी समय रेंज में खैर से भरी पिकअप गाड़ी और एक बाइक को रोकने का प्रयास किया। इस पर पिकअप गाड़ी टक्कर मारकर फरार हो गया। घायल दारोगा का मेडिकल कराया गया। दारोगा की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। नजीबाबाद पुलिस ने इसकी जांच शुरू की।
रविवार को पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस वार्ता में एएसपी सिटी कृष्ण गोपाल सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया है कि गांव चंपतपुर चकला निवासीगण बब्बू उर्फ बगग्ड़, सतनाम, गांव कासमपुर गढ़ी निवासी इकरार, गांव मदपुररी निवासीगण, खेम सिंह, राजपाल, सोनू बिजनौरिया व सोनू के नाम प्रकाश में आए। पुलिस ने शनिवार रात बब्बू, सतनाम व इकरार को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से खैर की लकड़ी के बेचने के 45 हजार रुपये व होंडा सिटी कार बरामद हुई है।
आरोपितों ने बताया कि वेज जंगलों से खैर, शीशम व सागौन के पेड़ों की रेकी करते थे। रात के समय काटकर पिकअप गाड़ी में भरकर ले जाते थे। आरोपित चोरी की लकड़ी को अफजलगढ़ क्षेत्र के रहने वाले ठेकेदार सलीम और इकरार को बेचते थे। मुख्य आरोपित बब्बू पर पांच आपराधिक केस दर्ज हैं, जबकि सतनाम पर तीन केस दर्ज हैं। पुलिस अन्य आरोपितों की तलाश का रही है।
पुष्पा फिल्म देखकर बनाई योजना, चार गुणा देते थे मजदूरी
पुष्पा फिल्म देखकर उन्होंने लकड़ी की तस्करी की योजना बनाई। महंगे पेड़ों को चिन्हित कर करते थे। पहले गिरोह के सदस्य दिन में रेकी कर लेते थे। इसके बाद रात में पिकअप गाड़ी से वहां पहुंचते थे। पेड़ काट लेते थे। इस दौरान अन्य साथी कार व बाइकों से आगे-पीछे चलते थे। कभी-कभी ज्यादा लकड़ी कटने पर दो हजार रुपये मजदूरी देकर श्रमिकों को बुला लेते थे।
कोतवाल अमित कुमार मलिक ने बताया कि खैर की लकड़ी सरकारी दाम 12 हजार रुपये क्विंटल है, जबकि खुले बाजार में इसकी अधिक कीमत है। पुलिस गिरोह की कुंडली खंगाल रही है। अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगा।
