नांगल सोती (बिजनौर) : जिले को ओडीएफ घोषित कराने की जल्दबाजी में अफसरों ने शौचालय निर्माण के मानकों और उनके इस्तेमाल पर ध्यान ही नहीं दिया। अधूरे बने शौचालयों के बावजूद सभी गांवों को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया गया। हैरत यह भी है कि जिले से लेकर मंडल और प्रदेश तक की टीमों ने जांच कर ली लेकिन उन्हें कहीं कोई कमी नजर नहीं आई। दैनिक जागरण की टीम ने ब्लाक नजीबाबाद के ग्राम बाखरपुर में पहुंचकर स्थिति की पता लगाया तो हालात बेहद खराब मिले। बहुत से शौचालयों में उपले व अन्य सामान भरा मिला जबकि कुछ अधूरे पड़े हैं और कई लोगों के पात्र होने के बावजूद उनके शौचालयों का निर्माण नहीं कराया गया।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत अकेले ग्राम पंचायत बाखरपुर में बने शौचालयों का निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए, तो निर्माण में बरती गई लापरवाही की पोल खुल जाएगी। गांव में मुकीम, धूम ¨सह, सरफराज, असगर, बिजेंद्र, जितेन्द्र, सलीम आदि के घरों में बने शौचालयों के लिए गड्ढे तक नहीं खुदवाए गए। इसके अलावा शौचालयों के दरवाजे और शीट की गुणवत्ता का ध्यान भी नहीं रखा गया। वहीं असलम, दिलशेर ,इसलामुद्दीन, विरेंद आदि ग्रामीणों के घरों में पहले से शौचालयों बने होने के बावजूद कागजों पर उनके घरों में भी शौचालय बनवाना दर्शा दिया गया। सूत्रों का कहना है कि विकास विभाग ने इस गांव में 98 शौचालयों के निर्माण को आई करीब 11 लाख रुपये की धनराशि पात्रों के खाते में जमा कराने के बजाय पंचायत सचिव और प्रधान ने अपने हिसाब से खर्च किए।

शौचालयों में भरा सामान

यदि ग्राम बाखरपुर में शौचालयों की सही प्रकार से जांच कराई जाए, तो उनके निर्माण की स्वत: पोल खुल जाएगी। गांव में बने कई शौचालयों में समान भरा हुआ है। वहीं कई शौचालयों की हालत बद से बदतर है, जबकि कई अन्य शौचालयों में कबूतर पल रहे हैं। वहीं चुनावी समीकरण बैठाने के चक्कर में शौचालय निर्माण में अनियमितता बरती गई। इस कारण कई पात्र इस योजना से वंचित रह गए।

इनका है कहना..

गांव में शौचालयों का निर्माण शासन द्वारा निर्धारित मानक के अनुरूप किया गया है, यदि शौचालय निर्माण में कोई खामी रह गई है, तो उसे ठीक करा दिया जाएगा।

- जगत ¨सह, ग्राम प्रधान बाखरपुर।

Posted By: Jagran

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